भारत ने शनिवार को बिना पूर्व सरकारी मंजूरी के गेहूं के निर्यात पर रोक लगा दी है। इस फैसले से विश्व समुदाय खास तौर पर यूरोपीय देशों को खासा झटका लगा है। हाल ही में गर्म तापमान के कारण पैदावर पर असर पड़ा है।औद्योगिक नेतृत्व वाले सात देशों के समूह G-7 के कृषि मंत्रियों ने भारत के गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने के फैसले की कड़ी आलोचना की है। जर्मन कृषि मंत्री केम ओजडेमिर ने स्टटगार्ट में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि अगर हर कोई इस तरह निर्यात रोक देगा या बाजार बंद करने लगेगा, तो इससे संकट और गहरा जाएगा।

भारत के फैसले से क्यों हुई परेशानी?

दरअसल, रूस के यूक्रेन पर हमले के कारण वैश्विक कृषि बाजार गंभीर तनाव में है। बता दें कि रूस और यूक्रेन दुनिया से सबसे बड़े खाद्यान्न उत्पादक देशों में एक हैं। रूस पर दुनिया ने प्रतिबंध लगा रखा है और यूक्रेन से निर्यात संभव नहीं हो पा रहा है। रुसी आक्रमण से पहले यूक्रेन ने अपने बंदरगाहों के जरिए हम महीने 4.5 मिलियन टन कृषि उपज का निर्यात किया था। मगर हमले के बाद रुसी सेना ने ओडेसा, कोर्नोमोर्स्क और दूसरे पोर्ट को दुनिया से काट दिया है। ऐसे में केवल जमीनी रूट से सप्लाई की जा सकती है, जिसमें काफी देर लगती है और हवाई हमले का भी अंदेशा है। ऐसे में गेहूं की सप्लाई की समस्या झेल रहे देशों को भारत ने भी झटका दे दिया। बता दें कि भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गेहूं पैदा करने वाला देश है।

भारत ने क्यों रोका निर्यात?

इस संबंध में 13 मई, शुक्रवार को जारी अधिसूचना के मुताबिक भारत ने घरेलू स्तर पर बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के उपायों के तहत गेहूं के निर्यात पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया है। भारत ने बताया कि इस फैसले के पीछे गेहूं की कम पैदावार और वैश्विक कीमतें में आई तेजी से उछाल, मुख्य कारण हैं। वहीं युद्ध की वजह से वह अब अपनी"खाद्य सुरक्षा" को लेकर चिंतित था। वैसे, शुक्रवार को जारी निर्देश से पहले की सभी खेप और एक्सपोर्ट डील पर कोई रोक नहीं होगी। मगर भविष्य के सभी शिपमेंट के लिए सरकार की मंजूरी जरूरी है। यानी निर्यात तभी किया जा सकता है, जब किसी देश के अनुरोध पर भारत सरकार इसकी मंजूरी दे दे।

क्या होगा असर?

गेहूं की सप्लाई पर पड़े असर को देखते हुए G7 औद्योगिक देशों के मंत्रियों ने दुनिया भर के देशों से कोई प्रतिबंध नहीं लगाने का आग्रह किया था, क्योंकि इससे उपज बाजारों पर और दबाव बढ़ सकता है। लेकिन भारत के फैसले से उन्हें झटका लगा है। हो सकता है इसी तरह कुछ और देश भी निर्यात में कटौती कर दें। इससे दुनिया भर में खाद्यान्न की समस्या पैदा हो जाएगी। कृषि मंत्री ने जून में जर्मनी में होने वाले G7 शिखर सम्मेलन में इस मुद्दे को उठाने की बात कही है। इस सम्मेलन में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के भी शामिल होने की संभावना है।

Posted By: Shailendra Kumar