लंदन। भारत से हर मोर्चे पर मुंह की खाने के बाद भी पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। भारत में नोटबंदी के तीन साल के बाद पाकिस्तान ने लश्कर-ए-तैयबा व जैश-ए-मुहम्मद जैसे आतंकी संगठनों की फंडिंग के लिए नकली भारतीय मुद्रा की तस्करी का काम फिर शुरू कर दिया है। अधिकारियों के हवाले से न्यूज एजेंसी ने दावा किया है कि भारत में नकली नोटों की तस्करी के लिए पाकिस्तान उन्हीं गिरोह, सिंडीकेट और रास्तों का फिर से इस्तेमाल कर रहा है, जिनका उपयोग वह 2016 से पहले कर रहा है था। हैरतअंगेज बात यह है कि इस काम के लिए वह नेपाल, बांग्लादेश व अन्य देशों में मौजूद अपने राजनयिक चैनलों का भी दुरुपयोग कर रहा है। गौरतलब है कि कालेधन की समस्या से निपटने के लिए भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आठ नवंबर, 2016 को 500 व 1000 रुपये नोटों को बंद करने की घोषणा की थी। पीएम मोदी के इस फैसले से भारत में घुसपैठ करने वाले आतंकी संगठनों की फंडिंग को तगड़ा झटका लगा था। सूत्रों के मुताबिक , नकली नोटों की तस्करी दोबारा सक्रिय करने में पाक की खुफिया एजेंसी आईएसआई अहम भूमिका निभा रही है। अब वह पहले से बेहतर नकली नोट छापने लगे हैं।

नकली नोटों की तस्करी कर भारत की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने के पाकिस्तान कई रास्तों का उपयोग कर रहा है। इस साल मई में दाऊद इब्राहिम की डी-कंपनी के खास सहयोगी यूनुस अंसारी को काठमांडू एयरपोर्ट पर 7.67 करोड़ रुपये के नकली नोट के साथ पकड़ा गया था। उस समय उसके साथ तीन पाकिस्तानी नागरिक भी मौजूद थे। 22 सितंबर को भारत के पंजाब प्रांत में खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स के पास से 1 करोड़ रुपये के नकली नोटों के साथ हथियार बरामद किए थे। नोट और हथियार पाकिस्तानी से ड्रोन के जरिये भारत पहुंचाए गए था। उसी माह ढाका पुलिस ने 49.5 लाख की नकली भारतीय मुद्रा जब्त की थी। बांग्लादेश में पाकिस्तानी उच्चायोग के अधिकारियों को नकली भारतीय मुद्रा की तस्करी में सहयोग की वजह से बर्खास्त तक किया जा चुका है।

सूत्रों के अनुसार भारत में नकली नोटों की तस्करी के लिए आईएसआई पाकिस्तानी इंटरनेशनल एयरलाइंस (पीआईए) की मदद ले रहा है। इसके साथ ही वह दुबई, कुआलालंपुर, हांगकांग और दोहा में मौजूद अपने राजनयिक चैनलों का भी इस काम के लिए दुरुपयोग कर रहा है। नकली नोटों की खेप पीआईए के साथ ही अन्य अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के जरिये काठमांडू व ढाका तक पहुंचाई जा रही है। नोटों की तस्करी से हुई कमाई से आतंकी संगठनों की फंडिंग की जा रही है।