इस्लामाबाद। पाकिस्तान को शुक्रवार को बड़ा झटका लगा। फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) ने टेरर फंडिंग के मामले में पाकिस्तान को संदिग्ध सूची में डाले जाने के बाद ब्लैकलिस्ट कर दिया है। टास्क फोर्स के एशिया-पैसिफिक ग्रुप ने पाकिस्तान को अपने मानकों पर खरा नहीं उतरने पर यह कदम उठाया है। टास्क फोर्स की ऑस्ट्रेलियाई शहर कैनबरा में बैठक हो रही है।

अभी तक पाकिस्तान एफएटीएफ की 'ग्रे' सूची में शामिल था। संस्था ने 11 बिंदुओं पर पाकिस्तान के टेरर फंडिंग मामले का आकलन किया है और इनमें 10 मानकों के अनुपालन में पाकिस्तान 'असफल' साबित हुआ है। फाटा के इस फैसले का पाकिस्तान पर बड़े पैमाने पर असर होगा। पहले से ही आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान के लिए विदेश से अब आर्थिक मदद हासिल करना आसान नहीं होगा। साथ ही विदेशी कंपनियां भी वहां अब निवेश करने से हिचकिचाएंगी।

हालांकि, अक्टूबर में होने वाली अपनी बैठक में पाकिस्तान को 'काली सूची' में डालने पर फैसला लेगा। एपीजी की अंतिम रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान अपने कानूनी और वित्तीय प्रणालियों के लिए 40 मानकों में से 32 को पूरा करने में असफल रहा। इसके अलावा टेरर फंडिंग के खिलाफ सुरक्षा उपायों के लिए तय किए गए 11 मापदंडों में से 10 को पाकिस्तान पूरा नहीं कर सका।

लिहाजा, ऐसी स्थिति में यह कहना गलत नहीं होगा कि पाकिस्तान अक्टूबर में ब्लैक लिस्ट हो सकता है, क्योंकि एफएटीएफ की 27-पॉइंट एक्शन प्लान की 15 महीने की समयावधि इसी साल अक्टूबर में खत्म हो रही है।

बताते चलें कि अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी, इंग्लैंड के दबाव के बाद फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) पाकिस्तान को जून 2018 से संदिग्ध सूची में डाल दिया था।

Posted By: Shashank Shekhar Bajpai