वाशिंगटन। साल 2007 में रहस्यमय तरीके से गायब हुए एक पूर्व एफबीआई एजेंट की ईरानी हिरासत में मौत हो गई है। उनके परिवार ने बुधवार को कहा कि अमेरिकी खुफिया अधिकारियों ने उनकी 13 साल की उम्मीद तोड़ दी। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बॉब लेविंसन की मौत की पुष्टि नहीं की। उन्होंने कहा कि ईरान ने पूर्व एजेंट के बारे में कोई खबर नहीं दी थी, जो इस महीने 72 साल के हो गए थे।

मगर, लेविंसन के परिवार ने कहा कि यह पता चला है कि वह मर चुके थे। हालांकि, उनकी मौत कैसे या कब हुई, इसकी कोई जानकारी नहीं दी। परिवार ने एक बयान में कहा कि हमने हाल ही में अमेरिकी अधिकारियों से जानकारी मिली है, जिससे उनका और हमारा, दोनों का निष्कर्ष है कि हमारे अद्भुत पति और पिता की ईरानी हिरासत में मौत हो गई। उनके परिवार ने कहा- हम यह भी नहीं जानते कि उनकी मौत कब हुई है। हमें तो यह भी नहीं पता है कि उसका शरीर हमें लौटाया भी जाएगा या नहीं। यह क्रूरता की परिभाषा है।

परिवार ने कहा कि लेविंसन की मृत्यु कोरोनोवायरस महामारी से पहले हुई थी, जिसने ईरान को बुरी तरह प्रभावित किया है और इस वायरस के प्रकोप की वजह से अधिकारियों ने हजारों कैदियों को अस्थायी रूप से रिहा करने का फैसला किया था। मगर, लेविंसन उन कई अमेरिकियों में से एक हैं, जो अमेरिका के कट्टर दुश्मन देश ईरान में गायब हो गए हैं। मगर, उनका मामला उनके परिवार को सबसे अधिक परेशान करने वाला रहा था, जिनके बारे में माना जाता रहा था कि वह अब तक जिंदा हैं।

सात बच्चों के पिता लेविंसन मार्च 2007 में किश द्वीप से गायब हो गए थे, जहां ईरान के बाकी हिस्सों की तुलना में अधिक उदार वीजा नियम हैं। परिवार ने बताया कि वह नकली सिगरेट के मामलों की जांच कर रहे थे। द वाशिंगटन पोस्ट ने साल 2013 में बताया था कि लेविंसन FBI से सेवानिवृत्त होने के बाद CIA के लिए काम कर रहे थे और ईरान पर खुफिया जानकारी जुटाने के उद्देश्य से एक मिशन पर गए थे। उस समय कहा गया था कि CIA ने लेविंसन की पत्नी क्रिस्टीन को लेविंसन के लापता होने की जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए 25 लाख डॉलर का भुगतान किया था।

उनके परिवार ने बुधवार को तेहरान पर लेविंसन के बारे में बार-बार दुनिया से झूठ बोलने का आरोप लगाया और अमेरिका की शुरुआती प्रतिक्रिया की भी आलोचना की। दरअसल, अधिकारियों ने शुरू में लेविंसन को एक बंधक के रूप में वर्गीकृत नहीं किया था और उन्होंने लगातार इस बात से इनकार किया था कि लेविंसन सरकार के लिए काम करते थे। उधर, ईरानी अधिकारियों ने भी बार-बार कहा कि उन्हें लेविंसन के बारे में कोई जानकारी नहीं है।

बताते चलें कि साल 2010 में दाढ़ी में दिख रहे लेविंसन का एक वीडियो टेप सामने आया था, जिसमें वह क्यूबा के ग्वांतानामो बे में अमेरिकी नौसैनिक अड्डे पर अनिश्चित काल के लिए कैदियों द्वारा पहने जाने वाले प्रकार का एक नारंगी जंपसूट पहने दिख रहे थे। फुटेज में अनुमान लगाया गया कि वह पाकिस्तान में चरमपंथियों के कब्जे में हो सकता है, लेकिन बाद में अमेरिकी अधिकारियों ने इस आशंका को खारिज कर दिया था।

ट्रंप ने एक उम्मीदवार के रूप में अपने पूर्ववर्ती बराक ओबामा पर ईरान के साथ बातचीत में लेविंसन का मुद्दा मजबूती से नहीं उठाने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा कि पूर्व एजेंट को लंबे समय से स्वास्थ्य समस्याएं थीं। मगर, ट्रंप ने इस बात को स्वीकार नहीं किया कि लेविंसन की मौत हो चुकी है। उन्होंने हमें नहीं बताया कि वह मर चुका है, लेकिन बहुत से लोग सोच रहे हैं कि ऐसा हो सकता है।

बताते चलें कि साल 2016 में ईरान ने ईरानी मूल के चार अमेरिकी नागरिकों को रिहा कर दिया था, जब उसने बराक ओबामा के साथ परमाणु समझौता किया था। मगर, ट्रंप के शासन काल में ईरान और अमेरिका के संबंध तेजी से बिगड़ गए। ट्रंप, ईरान के साथ परमाणु समझौते से हट गए और उन्होंने ईरान पर व्यापक प्रतिबंधों लागा दिए थे।

Posted By: Shashank Shekhar Bajpai