पेरस। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉ ने घोषणा की कि वह अन्य देशों को इमाम और इस्लामी शिक्षकों को फ्रांस में आने से रोकेंगे। उन्होंने कहा कि 'अलगाववाद' को रोकने का यह एक प्रयास है। इसके साथ ही मस्जिदों को वित्तपोषित कैसे किया जाता है, इसमें पारदर्शिता के लिए एक नए कानून का मसौदा तैयार किया जा रहा है। मैक्रॉ ने कहा कि वह धीरे-धीरे इस अभ्यास पर रोक लगा देंगे जिसमें अल्जीरिया, मोरक्को और तुर्की सहित विदेशी से मस्जिदों में उपदेश देने के लिए फ्रांस में इमामों की तैनाती की जाती है।

मैक्रॉ ने पूर्वी शहर मुलहाउस की यात्रा के दौरान मंगलवार को कहा कि विदेशी प्रभाव को रोकने और यह सुनिश्चित करने के लिए कि हर कोई गणतंत्र के कानूनों का सम्मान करे, कांसुलर इस्लाम प्रणाली को खत्म करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। बताते चलें कि फ्रांस यूरोप के सबसे बड़े मुस्लिम समुदाय का घर है।

मैक्रॉ ने कहा कि उनके प्रशासन ने फ्रांस में इस्लाम का प्रतिनिधित्व करने वाले निकाय फ्रेंच मुस्लिम काउंसिल (सीएफसीएम) से फ्रेंच क्षेत्र पर प्रशिक्षण इमामों पर ध्यान केंद्रित करने को कहा है। इसके साथ ही यह सुनिश्चित करने के लिए भी कहा गया है कि वे फ्रेंच भाषा बोलें और कट्टरपंथी इस्लामी विचारों को न फैलाएं।

मैक्रॉ के अनुसार, हर साल 300 इमाम फ्रांस में भेजे जाते हैं। उन्होंने कहा कि 2020 में आने वालों इमाम आखिरी होंगे, और अब विदेशी इमामों के लिए फ्रांस के दरवाजे नहीं खोले जाएंगे। मैक्रॉ ने कहा कि समस्या तब होती है, जब धर्म के नाम पर कुछ लोग खुद को गणतंत्र से अलग करना चाहते हैं और इसलिए कानूनों का सम्मान नहीं करते हैं।

फ्रांस में वर्तमान में नौ देशों के साथ समझौते हैं। इसके तहत बिना फ्रेंच अधिकारियों के पर्यवेक्षण के वहां की सरकारें फ्रांसीसी स्कूलों में छात्रों को मूल संस्कृति और भाषा छात्रों को पढ़ाने के लिए शिक्षकों को भेज सकती हैं। मैक्रॉ ने कहा कि फ्रांस इसके बजाय अन्य देशों के साथ द्विपक्षीय समझौते स्थापित करेगा, जिससे फ्रांसीसी अधिकारियों को सितंबर में शुरू होने वाले पाठ्यक्रमों और उनकी सामग्री पर नियंत्रण रखने की अनुमति मिल सके।

Posted By: Shashank Shekhar Bajpai