ओसाका। विजय माल्या, नीरव मोदी जैसे भगोड़ों से परेशान भारत को G-20 देशों का समर्थन मिला है। ऐसे अपराधियों के खिलाफ भारत की मुहिम को दुनिया के दिग्गज 20 देशों के समूह ने बेहद गंभीरता से लिया है। इस बैठक के बाद जारी घोषणा-पत्र में कहा गया है कि गंभीर आर्थिक अपराध से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर जल्द ही एक प्रपत्र तैयार किया जाएगा जो इन अपराधियों की संपत्तियों को जब्त करने की राह खोलेगा। यही नहीं, G-20 देशों ने भ्रष्टाचार करने वालों को किसी भी दूसरे देश में पनाह नहीं देने और उनके चोरी के धन को जब्त करने की रजामंदी दिखाई है। इसे भारत के रुख का एक बड़ा समर्थन माना जा रहा है क्योंकि शीर्ष बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आर्थिक भगोड़ों के खिलाफ त्वरित और ठोस कार्रवाई की मांग की थी।

प्रधानमंत्री मोदी के अलावा भारत के दूसरे प्रतिनिधि भी हाल के महीनों में आर्थिक अपराध कर दूसरे देशों में छिपने वाले अपराधियों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सहयोग की अपील कर रहे हैं। भारत का यह रुख हाल के वर्षों में विजय माल्या, नीरव मोदी, मेहुल चोकसी जैसे अपराधियों की वजह से बना है। इन तीनों ने संयुक्त तौर पर भारतीय बैंकों को संयुक्त तौर पर तकरीबन 20 हजार करोड़ रुपये का चूना लगाया है। माल्या और मोदी लंदन में और चोकसी एंटीगुआ में शरण लिए हुए है जिन्हें लाने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है।

आर्थिक भगोड़ों के मुद्दे को भारत की तरफ से दी जा रही प्राथमिकता के बारे में G-20 देशों के लिए सरकार के विशेष प्रतिनिधि सुरेश प्रभु ने बताया, 'हम बहुत मजबूती से आर्थिक अपराधियों से निपटने के एजेंडे का प्रस्ताव कर रहे थे। हमारा मानना है कि एक देश में भारी गबन करके दूसरे देश में पैसा छिपाने वाले या शरण लेने वाले लोगों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय समुदाय को एकजुट होना पड़ेगा।' माना जा रहा है कि G-20 में इस तरह की सहमति बनने के बाद भारत के लिए माल्या या नीरव मोदी को स्वदेश लाना आसान हो जाएगा।

Posted By: Arvind Dubey