बीजिंग। कारोबारी मुसीबतों और खर्चों में बढ़ोतरी की वजह से एक चौथाई जर्मन कंपनियां चीन छोड़ने की तैयारी कर रही हैं। जर्मन चेंबर ऑफ कॉमर्स के वार्षिक सर्वे में कहा गया है कि चीन में कार्यरत जर्मनी की 526 कंपनियों पर किए गए सर्वे के अनुसार 23 फीसद कंपनियों ने चीन से कारोबार समेटने का फैसला कर लिया है या इस पर विचार कर रही हैं। सर्वे के अनुसार, जो कंपनियां चीन छोड़ने पर विचार कर रही हैं, उनके से करीब तिहाई कंपनियां पूरी तरह कामकाज समेटने की तैयारी में हैं। बाकी बची कंपनियां अपना कुछ व्यापार दूसरे देशों में ट्रांसफर करने वाली हैं। कम लागत की वजह से भारत और दक्षिण एशियाई देश इन कंपनियों की पहली पसंद हो सकते हैं। गौरतलब है कि चीन अपनी अर्थव्यवस्था को संतुलित करने का प्रयास कर रहा है।

वह निर्यात और निवेश से उपभोक्ता खर्च आधारित अर्थव्यवस्ता की ओर बढ़ रहा है। इसके कारण से चीन में मानव संसाधन काफी मंहगा होता जा रहा है। यही वजह है कि कंपनियों की परिचालन लागत में लगातार इजाफा हो रहा है। इसके अलावा अमेरिका और चीन में जारी ट्रेड-वार की वजह से चीन से निर्यात मंहगा पड़ रहा है। इससे लागत की तुलना में मुनाफे में काफी कमी हो रही है। इस सर्वे में कहा गया है कि पिछले कुछ समय के दौरान चीन में कारोबार में गिरावट आई है। सर्वे के दौरान सिर्फ चौथाई कंपनियों ने इस साल अपने लक्ष्य प्राप्त करने की उम्मीद जताई। जबकि एक तिहाई कंपनियों ने कहा कि चीन द्वारा विदेशी कंपनियों के हित के लिए उठाए गए कदम पर्याप्त नहीं हैं।

गौरतलब है कि जर्मनी से पहले कुछ और पश्चिमी देशों की कंपनियां चीन से अपना कारोबार समेटने की बात कह चुकी हैं। यह कंपनियां वियतनाम, थाइलैंड, इंडोनेशिया और भारत की ओर देख रहीं हैं। चीन के मुकाबले भारत और अन्य दक्षिण एशियाई देशों में सस्ता मानव संसाधन उपलब्ध है।

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Ram Mandir Bhumi Pujan
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