मैड्रिड। अमेरिका की आपत्ति को अमान्य करते हुए जिब्राल्टर की सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार देर शाम ईरानी सुपर टैंकर ग्रेस वन को छोड़ने का आदेश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश ईरान के उस शपथ पत्र के दाखिल करने के बाद दिया जिसमें कहा गया था कि टैंकर में भरा तेल सीरिया नहीं भेजा जा रहा था।

ग्रेस वन के भारतीय कैप्टन ने बयान जारी कर सभी 27 साथियों सहित अपनी रिहाई में सहयोग देने वालों का आभार जताया।

जिब्राल्टर सरकार के प्रवक्ता ने कहा है कि टैंकर के चालक दल के भारतीय व अन्य देशों सदस्यों के खिलाफ पुलिस प्रक्रिया पूरी हो गई है और अब उन्हें रिहा कर दिया गया है।

टैंकर में तैनात कैप्टन समेत सभी 28 भारतीय भी रिहा हो गए हैं। भारत के विदेश राज्य मंत्री वी मुरलीधरन ने सभी भारतीयों के रिहा होने की पुष्टि की है। इस टैंकर को ब्रिटिश नौसेना के कमांडो ने चार जुलाई को अपने उपनिवेश जिब्राल्टर के करीब कब्जे में लिया था।

कच्चा तेल लेकर सीरिया के रास्ते पर था

यह टैंकर कच्चा तेल लेकर सीरिया के रास्ते पर था। सीरिया से कारोबार पर लगे प्रतिबंधों के चलते इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन माना गया था। गुरुवार को दिन में हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने उसे छोड़े जाने का आदेश दे दिया था।

लेकिन कुछ ही घंटों बाद अमेरिका ने कहा, यह अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को तोड़ने का मामला है इसलिए जिब्राल्टर ईरानी टैंकर को न छोड़े। कोर्ट का आदेश मिलने के बाद जिब्राल्टर की पुलिस ने ग्रेस वन और उस पर मौजूद सभी लोगों को मुक्त कर दिया।

टैंकर में 21 लाख बैरल कच्चा तेल

इस टैंकर में 21 लाख बैरल कच्चा तेल भरा हुआ है। ग्रेस वन को पकड़े जाने के जवाब में 19 जुलाई को ईरान ने ब्रिटिश झंडे वाले मालवाही जहाज स्टेना इंपेरो को होर्मुज स्ट्रेट में कब्जे में ले लिया। माना जा रहा है कि ग्रेस वन को छोड़े जाने के बाद स्टेना इंपेरो को ईरान छोड़ देगा।