वाशिंगटन। विभिन्न प्रकार के ट्रेड बैरियर और भू-राजनीतिक चिंताओं की वजह से ग्लोबल इकोनॉमी एक 'सिंक्रोनाइज्ड स्लोडाउन' के चक्र में फंसी है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट में यह बात कही गई है। आईएमएफ ने 2019 के लिए ग्लोबल इकोनॉमी की विकास दर का अनुमान घटाते हुए तीन फीसद कर दिया है। 2008 की मंदी के बाद से यह ग्लोबल इकोनॉमी की सबसे कम विकास दर होगी। आईएमएफ की चीफ इकोनॉमिस्ट गीता गोपीनाथ ने कहा, '2017 के 3.8 फीसद की तुलना में ग्लोबल इकोनॉमी की विकास दर तीन फीसद पर पहुंचना बेहद चिंताजनक है। सिंक्रोनाइज्ड स्लोडाउन और अनिश्चित हालात की वजह से ग्लोबल आउटलुक संदिग्ध है। तीन फीसद की विकास दर को देखते हुए नीति निर्माताओं के पास अनदेखी का कोई विकल्प नहीं है। सभी देशों के नीति निर्माताओं को मिलकर कारोबारी एवं अन्य राजनीतिक चिंताओं को खत्म करना होगा।' आईएमएफ ने 2020 में ग्लोबल इकोनॉमी की विकास दर 3.4 फीसद रहने का अनुमान जताया है।

गोपीनाथ ने कहा कि इस गिरावट के पीछे कुछ वजह काम कर रही हैं। ऊंचे शुल्क और कारोबार नीतियों पर लंबे समय से अनिश्चितता के माहौल ने निवेश को नुकसान पहुंचाया है। कैपिटल गुड्स की मांग पर भी इससे बुरा असर पड़ा है। ऑटो सेक्टर पर भी यूरो क्षेत्र और चीन में उत्सर्जन के नए मानकों की वजह से असर पड़ा है। 2019 की पहली छमाही में ट्रेड वॉल्युम ग्रोथ एक फीसद रही है, जो 2012 के बाद सबसे कम है। आईएमएफ ने चेताया है कि ब्रेक्जिट की वजह से उपजे संकट और कई तरह के ट्रेड बैरियर से सप्लाई चेन और कारोबारियों के भरोसे पर बुरा असर पड़ सकता है। गोपीनाथ ने यह भी कहा कि जलवायु परिवर्तन के खतरे भी अब साफ दिखने लगे हैं। अगर समय रहते नहीं निपटा गया, तो भविष्य में इनका भी व्यापक असर देखने को मिल सकता है।

आईएमएफ का कहना है कि दुनिया की विकसित अर्थव्यवस्थाओं की विकास दर 2019 और 2020 में 1.7 फीसद पर रहने का अनुमान है। वहीं, विकासशील व उभरती अर्थव्यवस्थाओं की विकास दर 2019 में 3.9 फीसद और 2020 में 4.6 फीसद रहने का अनुमान है। यूरो क्षेत्र की विकास दर इस साल 1.2 फीसद और अगले साल 1.4 फीसद रह सकती है। जर्मन इकोनॉमी की विकास दर महज आधा फीसद रहेगी। अमेरिका की अर्थव्यवस्था इस साल 2.1 फीसद और अगले साल 2.4 फीसद की दर से बढ़ने का अनुमान लगाया गया है।

आईएमएफ ने भारत की विकास दर का अनुमान भी घटाया है। हालांकि इसके बावजूद वैश्विक परिस्थिति में भारत कम विकास दर के साथ भी दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ रही अर्थव्यवस्था बना रहेगा। रिपोर्ट में चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की विकास दर का अनुमान 6.1 फीसद रखा गया है। इस साल अप्रैल में आईएमएफ ने 7.3 फीसद की विकास दर का अनुमान दिया था। जुलाई में इसे मामूली कम करते हुए विकास दर सात फीसद पर रहने का अनुमान जताया गया था। अच्छी खबर यह है कि आईएमएफ ने अगले साल भारत की विकास दर फिर सात फीसद रहने का अनुमान दिया है। इस दौरान चीन की विकास दर 5.8 फीसद रहने का अनुमान जताया गया है।

Posted By: Yogendra Sharma