ग्रीनलैंड । Greenland Ice Broken : पर्यावरणविद् और वैज्ञानिक समय समय पर ग्लोबल वॉर्मिग और ग्रीन हाउस गैसों के प्रभावों को लेकर चेतावनी देते रहते हैं। ग्लोबल वॉर्मिंग का सबसे ज्यादा बुरा असर ग्रीन लैंड और आर्कटिक द्वीप पर पड़ रहा है। अब हाल ही में ग्रीनलैंड में स्थित बर्फ के पहाड़ का एक बड़ा हिस्सा उत्तरी-पूर्वी आर्कटिक में टूट गया है। वैज्ञानिकों ने चेतावनी जारी करते हुए कहा कि यह तेजी से हो रहे जलवायु परिवर्तन का साक्ष्य है। यदि इसी तरह से धरती का तापमान बढ़ता गया तो धरती के फ्रीज कहे जाने वाले दोनों ध्रुवों पर से तेजी से बर्फ पिघलना शुरू हो जाएगी।

नेशनल जिओलॉजिकल सर्वे ऑफ डेनमार्क एंड ग्रीनलैंड ने बताया कि ग्लेशियर का जो हिस्सा टूटा है, वह करीब 110 वर्ग किलोमीटर बड़ा है। वैज्ञानिकों ने बताया कि यह एक बड़े पहाड़ से टूटा हुआ हिस्सा है, जो करीब 80 किलोमीटर लंबा और 20 किलोमीटर चौड़ा है। गौरतलब है कि हिमनद उत्तरी-पूर्वी ग्रीनलैंड आइस स्ट्रीम के अंत में है, जहां से बर्फ का विशालकाल हिस्सा जमीन से समुद्र में प्रवेश करेगा।

जीईयूएस नामक सर्वेक्षण के अनुसार, उत्तरी-पूर्वी ग्रीनलैंड में स्थित आर्कटिक के सबसे बड़े बर्फ के पहाड़ के पिघलने की वार्षिक दर पर ऑप्टिकल सैटेलाइट इमेजरी (उपग्रह से ली जाने वाली तस्वीरें) की मदद से नजर रखी जाती है। आर्कटिक के चप्पे-चप्पे पर सैटेलाइट के जरिए बर्फ पिघटने की दर का हर साल मापन किया जा रहा है।

इसी दौरान यह देखने को मिला है कि हाल ही में बर्फ का एक विशालकाय पहाड़ टूटा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक 1999 से अभी तक इस पहाड़ से 160 वर्ग किलोमीटर का हिमनद टूट चुका है, जो न्यूयॉर्क में मैनहाटन के क्षेत्रफल से दोगुना है। वैज्ञानिकों के मुताबिक यह काफी चिंताजनक स्थिति है और भविष्य में इसके भयावह परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

Posted By: Sandeep Chourey

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