मल्टीमीडिया डेस्क। दक्षिण अमेरिका में भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे गुप्ता परिवार को अमेरिका ने ब्लैक लिस्ट कर दिया है। गुप्ता परिवार त्तर प्रदेश के सहारनपुर का रहने वाला है। गुप्ता परिवार सहारनपुर में छोटा-मोटा किराने का व्यापार करता था और कुछ खास मसाले दक्षिण अफ्रीका के मेडागास्कर और जांजीबार से मंगवाता था। साउथ अफ्रीका में उनकी सफलता की कहानी 1993 में शुरू हुई। अतुल गुप्ता ने यहां पर मार्केटिंग कंपनी खोलकर लाखों कमाए। तीन सालों में अतुल की कंपनी ने काफी मुनापा कमा लिया। अब कंपनी का नाम सहारनपुर से जोड़ते हुए बदलकर सहारा कंप्यूटर कर दिया। इसके साथ ही गुप्ता परिवार सहारनपुर से अफ्रिका गया और वहीं का होकर रह गया।

गुप्ता परिवार की माइनिंग, सोना, कोयला, हीरा, स्टील, वाहन निर्माण जैसे कई तरह के कारोबारों में अलग अलग नामों से कंपनियां खुलने लगीं। गुप्ता परिवार का शुमार बड़े कारोबबारी घरानों में होने लगा। इसके साथ ही अफ्रीकी राजनीतिज्ञ जैकब ज़ूमा का यह परिवार नजदीकी बन गया। जैकब के राजनीतिक प्रचार और प्रसार में गुप्ता परिवार ने काफी पैसा लगाया। गुप्ता परिवार हीरे के कारोबार से कारोबारी रिश्तों को आगे बढ़ाते रहे। हीरे के कारोबार के जरिए काला धन बनाने के गुर गुप्ता परिवार ने सीख लिए।

राजनीति में पैठ बढ़ाते हुए गुप्ता परिवार खुलकर जैकब के समर्थन में आ गया। साउथ अफ्रीका, दुबई, स्विटज़रलैंड जैसी जगहों पर कई आलीशान बंगले रखने वाले गुप्ता परिवार ने जैकब को उपहार में बंगले भी दिए थे। जैकब जब साउथ अफ्रीका के राष्ट्रपति बने तो सत्ता के सारे सूत्र गुप्ता परिवार के हाथों में आ गए। आला अफसरों की नियुक्तियां, सरकारी कॉंट्रैक्ट्स में हेर फेर, रिश्वत का बंटवारा और सरकार के करीब हर अहम काम में गुप्ता परिवार का पूरा दखल था। दक्षिण अफ्रिका में जैकब की सरकार को 'शैडो गवर्नमेंट' यानी गुप्ताओं के साये में चल रही सरकार तक कहा जाने लगा था।