इस्लामाबाद। पाकिस्तान का चर्चित बंदरगाह ग्वादर आने वाले सात सालों में कराची को पीछे छोड़ देगा। यह बात ग्वादर बंदरगाह के चीनी संचालनकर्ता ने कही है। पाकिस्तान के रणनीति के अहम हिस्से ग्वादर बंदरगाह में इस दौरान 47 हजार नई नौकरियां पैदा होंगी और ग्वादर पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के विकास में सबसे ज्यादा योगदान देने वाला शहर साबित होगा। बलूचिस्तान प्रांत का शहर ग्वादर चीन-पाकिस्तान इकोनोमिक कॉरीडोर (सीपीईसी) का आखिरी पड़ाव है और इस बंदरगाह से चीन के बड़े इलाके का माल पश्चिम एशियाई देशों और यूरोप को सप्लाई किया जाता है। यह जानकारी चाइना ओवरसीज पोर्ट्स होल्डिंग कंपनी (सीओपीएचसी), ग्वादर के चेयरमैन झांग बाओजोंग ने कही है।

बाओजोंग की यह बयान पाकिस्तान सरकार के ग्वादर को 23 साल के लिए विभिन्न करों से छूट देने के फैसले के बाद आया है। ग्वादर बंदरगाह से माल बाहर भेजने पर बिक्री कर और सीमा शुल्क में भी छूट दी जाएगी। पाक सरकार ने ग्वादर को फ्री जोन घोषित किया है। बाओझांग ने कहा कि सरकार का यह फैसला पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था में तस्वीर बदलने में कारगर कदम साबित होगा। सरकार के इस फैसले से ग्वादर में अरबों डॉलर के निवेश का रास्ता खुल गया है। गौरतलब है कि अभी कराची पाकिस्तान का सबसे ज्यादा विकसित और कर चुकाने वाला शहर है। चीन ने वन रोड-वन बेल्ट अभियान के अंतर्गत 2015 में सीपीईसी का कार्य शुरू किया था। यह चीन के खनिज संपदा से भरपूर उइगर बहुल शिनजियांग सूबे को पाकिस्तान के बलूचिस्तान राज्य के ग्वादर बंदरगाह को जोड़ता है।

इस बंदरगाह के बनने से चीन से पश्चिम एशिया और यूरोप की दूरी काफी कम हो गई है। यह कॉरीडोर गुलाम कश्मीर से होकर गुजरता है, इसलिए इस कॉरीडोर पर भारत को कड़ी आपत्ति है और इसी वजह से चीन के बहुत चाहने के बावजूद भारत इस परियोजना से नहीं जुड़ा है। सीपीईसी के अंतर्गत ही ग्वादर बंदरगाह का विकास किया गया है और इसकी व्यावसायिक गतिविधियों पर चीन का नियंत्रण है।

Posted By: Yogendra Sharma

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