कोरोना वायरस के खिलाफ दुनियाभर में जंग जारी है। कहीं हालात सुधर रहे हैं तो कहीं बेकाबू हो रहे हैं। इस बीच, आशंका जताई गई है कि कोरोना वायरस का सबसे ज्यादा खतरा अस्पतालों में है। एक तरह से अस्पताल कोरोना वायरस के हॉट स्पॉट बनते जा रहे हैं। यही कारण है कि मरीजों के इलाज में जुटे डॉक्टर और नर्सें अब इसकी चपेट में आने लगे हैं। यह ट्रेंड दुनियाभर में देखने को मिला है। भारत में 50 से ज्यादा स्वास्थ्य कर्मियों में कोरोना संक्रमण पाय गया है। यह रिपोर्ट द जर्नल ऑफ द अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन में प्रकाशित हुई है।

चीन भी देख चुका ऐसे हालात

कोरोना वायरस की शुरुआत चीन से हुई थी। वहां भी 7 फरवरी को जारी रिपोर्ट में चेतावनी जारी की गई थी कि महामारी का सबसे ज्यादा असर अस्पतालों में देखा जाएगा। यह तब की बात है जब चीन में केवल 34,546 केस सामने आए थे।

यह अध्ययन चीन के वुहान स्थित जोंगहान हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने किया है। अध्ययन के लिए डॉक्टरों ने 1 जनवरी से 28 जनवरी के बीच अपने देश के 138 अस्पतालों का अध्ययन किया था।

रिपोर्ट में कहा गया है कि जिन अस्पतालों में कोरोना वायरस मरीजों का इलाज हो रहा है, वहां हॉस्पिटल रिलेटेड ट्रांसमिशन का खतरा अधिक है।

इसके बाद द लेनसेट में 21 मार्च को प्रकाशित अध्ययन में चीन के नेशनल हेल्थ कमिशन के हवाले से कहा गया था कि मार्च तक 3300 हेल्थकेयर वर्कर्स इस बीमारी की चपेट में आ चुके थे।

भारत में भी खतरा

स्वास्थ्यकर्मियों के साथ भारत में भी यह खतरा बहुत अधिक है। यहां जरूरी साजो-सामान और उपकरणों की कमी है। झारखंड के एक अस्पताल में तो डॉक्टर रेन कोट पहनकर मरीजों का इलाज करते नजर आए हैं।

Posted By: Arvind Dubey

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