वॉशिंगटन। अमेरिका के ह्यूस्टन शहर में 22 सितंबर को होने जा रही भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली हाउडी मोदी में अमेरिकी रााष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी शामिल होंगे। पहले से ही इस बात के कयास लगाए जा रहे थे, लेकिन अब व्हाइट हाउस ने भी इसकी पुष्टि कर दी है। हाल के इतिहास में यह पहली बार नहीं है, जब दो बड़े लोकतांत्रिक देशों के नेता संयुक्त रूप से सभा को संबोधित करेंगे।

व्हाइट हाउस की मीडिया सचिव स्टेफिनी ने बयान जारी कर कहा- मोदी और ट्रंप की यह ज्वाइंट रैली भारत और अमेरिका के रिश्तों को मजबूत करने का अहम मौका होगी। ह्यूस्टन में होने वाला यह कार्यक्रम मोदी का साल 2014 में पीएम बनने के बाद भारतीय-अमेरिकियों को संबोधित करने का तीसरा बड़ा कार्यक्रम होगा।

मई में दूसरी बार पीएम चुने जाने के बाद अमेरिका में यह इस तरह की मोदी की पहली रैली है। इससे पहले साल 2014 में न्यूयॉर्क के मेडिसन स्क्वॉयर गार्डन में दो कार्यक्रम में आयोजित किए गए थे, जबकि साल 2016 में सिलिकॉन वैली में कार्यक्रम आयोजित किया गया था। दोनों ही कार्यक्रम में 20 हजार से ज्यादा लोग शामिल हुए थे।

मोदी की इस रैली पर पूरी दुनिया की नजरें हैं, खासतौर पर पाकिस्तान की। यह घटना पाकिस्तान के लिए किसी सदमे से कम नहीं है क्योंकि वह कश्मीर मामले में मध्यस्थता के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति से गुहार कर रहा है। मगर, इस कार्यक्रम में मोदी के साथ ट्रंप के आने से पाकिस्तान के मंसूबे धराशायी हो गए हैं।

ह्यूस्टर ने एनआरजी स्टेडियम में होने वाले 'हाउडी, मोदी! शेयर्ड ड्रीम्स, ब्राइट फ्यूचर्स' कार्यक्रम में मोदी के भाषण को सुनने के लिए अभी तक 50 हजार से भी ज्यादा भारतीय मूल के अमेरिकी लोग रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं। बताते चलें कि दक्षिण-पश्चिम अमेरिका में 'हाउ डू यू डू' (आप कैसे हैं) को संक्षिप्त रूप में 'हाउडी' कहा जाता है।

मोदी के कार्यक्रम के लिए ह्यूस्टन के सभी प्रमुख हाईवे पर उनके स्वागत में बड़े-बड़े होर्डिंग लगाए गए हैं। एनआरजी स्टेडियम में होने वाले इस कार्यक्रम का आयोजन टेक्सास इंडिया फोरम (टीआईएफ) कर रहा है। ट्रंप भी इस रैली में शामिल होकर ह्यूस्टन की जनता को वैसे ही संबोधित कर सकते हैं, जैसे ब्रिटेन के पूर्व पीएम डेविड कैमरन ने साल 2015 में लंदन के विम्बले में मोदी की रैली के दौरान किया था।

इसके साथ ही आने वाले दिनों में अमेरिका और भारत व्यापार को लेकर घोषणा कर सकते हैं, जिससे द्विपक्षीय संबंधों पर लंबे समय से चली आ रही विवाद की स्थिति को खत्म किया जा सके।