बगदाद। इराक में गुरुवार को देशभर में हजारों महिलाओं ने सरकार विरोधी प्रदर्शनों में हिस्सा लिया। प्रभावशाली शिया धर्मगुरु मुक्तदा अल-सद्र ने महिलाओं को विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लेने से मना किया था। इसके बावजूद धर्मगुरु के आदेश की धज्जियां उड़ाते हुए महिलाएं सड़कों पर उतर आईं। उन्होंने कहा कि देश की आधी आबादी यानी महिलाएं पुरुषों से किसी मामले में कम नहीं हैं।

बताते चलें कि शिया नेता अल-सद्र ने शुरू में विरोध आंदोलन का समर्थन दिया था और फिर समर्थन वापस ले लिया और फिर इसे बहाल किया है। उन्होंने यह भी कहा था कि प्रदर्शनकारी ड्रग्स और शराब का उपयोग कर रहे थे। लिहाजा, इन प्रदर्शनों में महिलाए शामिल नहीं हों, इसलिए धर्मगुरु और शिया नेता सद्र ने कहा था कि पुरुषों के साथ महिलाओं का सड़कों पर उतरना अनैतिक है। उन्हें प्रदर्शन के लिए सड़कों पर नहीं आना चाहिए।

हालांकि, महिलाएं उनके आदेश को हवा में उड़ाते हुए पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर सड़कों पर प्रदर्शन कर रही हैं। 20 वर्षीय रुवेदा खेटर ने कहा कि हम अल-सद्र के ट्वीट को अस्वीकार करते हैं। हम अपने अधिकारों के लिए विरोध कर रहे हैं क्योंकि इराक में वे खत्म हो चुके हैं।

लंबे समय से चली आ रही शिकायतों से परेशान लोग इराकियों को बुनियादी सेवाओं, नौकरी के अधिक अवसरों और देश में सरकारी भ्रष्टाचार और विदेशी हस्तक्षेप को समाप्त करने की मांग करते हुए सड़कों पर उतर आए हैं। महिलाएं इन आंदोलन में सबसे आगे रही हैं। बताते चलें कि इराक में सत्ता परिवर्तन से लेकर अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और भ्रष्टाचार को खत्म करने की मांग को लेकर पिछले साल अक्टूबर से अभी तक लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं।

हिंसक प्रदर्शनों के दौरान अभी तक 544 लोगों की मौत हो चुकी है। सुरक्षाबलों की कार्रवाई में 27 हजार से अधिक लोग घायल भी हुए हैं। प्रदर्शनकारियों के दबाव को देखते हुए राष्ट्रपति बरहाम सालेह ने देश के नए प्रधानमंत्री के रूप में मुहम्मद तौफीक अलावी की नियुक्ति की है। हालांकि, देश में सरकार विरोधी प्रदर्शन अभी भी जारी हैं।

Posted By: Shashank Shekhar Bajpai

fantasy cricket
fantasy cricket