Afghanistan Crisis : अफगानिस्तान की तालिबानी सरकार के लिए मुसीबतें बढ़ गई हैं। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने अफगानिस्‍तान को दी जाने वाली सैकड़ों मिलियन डॉलर की आर्थिक सहायता रोक दी है। इस बारे में IMF की ओर से कहा गया है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय समुदाय तालिबान के नेतृत्व वाली सरकार को मान्यता देने के मुद्दे पर एकमत नहीं होता, तब तक अफगानिस्तान को उसकी तरफ से कोई मदद नहीं दी जाएगी। वैसे IMF ने अफगानिस्तान के आर्थिक हालात को लेकर चिंता जताई और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से यहां किसी मानवीय संकट को रोकने के लिए तत्काल कदम उठाने का आग्रह किया।

IMF को क्या है परेशानी?

IMF के प्रवक्ता गैरी राइस ने कहा कि अफगानिस्तान के साथ हमारा सहयोग तब तक स्थगित कर दिया गया है, जब तक कि सरकार की मान्यता पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय के भीतर स्पष्टता नहीं हो जाती। उन्होंने कहा हम तभी कोई कदम उठा सकते हैं, जब अंतरराष्ट्रीय समुदाय अफगानिस्तान में सरकार की मान्यता को लेकर निश्चित हो जाए। क्योंकि हम अंतरराष्ट्रीय समुदाय से निर्देशित होते हैं। अभी हमारे पास इस बारे में कोई स्पष्टता नहीं है, इसलिए वहां IMF कार्यक्रम को रोक दिया गया है।

तालिबानी सरकार को क्यों नहीं मिल रही मान्यता?

तालिबान ने 15 अगस्त को अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया था और नई सरकार का गठन भी हो गया है। लेकिन अफगानिस्तान में अभी भी विभिन्न गुटों में मतभेद जारी है और सरकार को लेकर स्पष्टता नहीं है। दुनिया के कई देशों ने घोषणा की है कि वे तालिबान के शासन को राजनयिक मान्यता देने से पहले देखेंगे कि वह एक समावेशी अफगान सरकार और मानवाधिकार जैसे मुद्दों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय से किए गए अपने वादों को पूरा करता है या नहीं।

क्या है अफगानिस्तान की स्थिति?

अफगानिस्‍तान पहले से ही गंभीर गरीबी और सूखे का सामना कर रहा था लेकिन जब पिछले महीने देश पर तालिबान ने कब्‍जा किया तब स्थिति और विकट हो गई। लाखों लोगों के देश छोड़ने से आर्थिक गतिविधियां भी लगभग ठप हैं। विदेशी दानदाताओं ने भी अफगानिस्‍तान को मदद रोक दी है। यूनाइटेड नेशंस (UN) ने भी पिछले दिनों चेतावनी दी है कि देश में जल्‍द ही भुखमरी और गरीबी का राज होगा। साथ ही सामाजिक व्‍यवस्‍था भी चरमरा जाएगी। यूएन की मानें तो अगर इस देश को अगर वित्‍तीय मदद नहीं मिली तो फिर लाखों अफगान नागरिक गरीबी और भुखमरी में जीने को मजबूर होंगे, साथ ही देश पूरी तरह से बिखर जाएगा। UN की विशेष दूत डेबराह लियोन्‍स ने दुनिया के देशों से अपील की है कि वो एक साथ आकर देश को बर्बाद होने से बचाएं। उन्‍होंने इस बात की आशंका भी जताई कि तालिबान का इस्‍लामिक राज दूसरे पड़ोसी देशों की तरफ भी बढ़ सकता है।

Posted By: Shailendra Kumar