जकार्ता। दक्षिण पूर्व एशियाई देश अमीर देशों के लिए डंपिंग ग्राउंड बनने से इनकार कर रहे हैं। इंडोनेशिया यह घोषणा करने वाला नया देश है, जिसने ऑस्ट्रेलिया से आए 210 टन कचरे को इंडोनेशिया ने वापस भेजने का फैसला किया है। प्लास्टिक रिसाइक्लिंग के नाम पर ऑस्ट्रेलिया से भेजे गए कंटेनरों में सड़ा-गला और हानिकारक कचरा मिलने के बाद इंडोनेशिया के पर्यावरण मंत्रालय ने यह निर्णय लिया है।

आठ जहाजों में विभिन्न प्रकार के अपशिष्ट पाए गए, जिनमें घरेलू कचरा, इलेक्ट्रॉनिक कचरा, प्लास्टिक की बोतलें और डायपर शामिल हैं। अनुबंधों के अनुसार, इंडोनेशिया को केवल को केवल बेकार कागज ही भेजा जाना था। ऑस्ट्रेलियाई कंपनी ओशनिक मल्टीट्रेडिंग द्वारा भेजे गए कचरे के निरीक्षण के बाद इंडोनेशिया के पर्यावरण मंत्रालय ने सोमवार को कहा कि कंटेनरों को वापस ऑस्ट्रेलिया भेज दिया जाएगा।

ईस्ट जावा कस्टम एजेंसी द्वारा सुराबाया में कंटेनरों की जांच में पता चला कि उनमें प्लास्टिक के अलावा स्वास्थ्य के लिए खतरनाक कचरा भी है। एजेंसी ने कहा है कि स्थानीय लोगों के हित और पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए इसे वापस भेज दिया जाएगा। इंडोनेशिया ने पिछले सप्ताह भी कचरे से भरे 49 कंटेनर फ्रांस और अन्य देश वापस भेजने का एलान किया था।

मई में मलेशिया ने कहा कि वह 450 टन प्लास्टिक कचरे को उन देशों को वापस भेज रहा है, जहां से उन्हें देश में रीसाइकिलिंग के लिए भेजा गया था। इन देशों में ऑस्ट्रेलिया, बांग्लादेश, कनाडा, चीन, जापान, सऊदी अरब और संयुक्त राज्य अमेरिका शामिल हैं। फिलीपींस ने भी पिछले महीने कनाडा से भेजे गए 69 कंटेनरों का कचरा वापस भेज दिया था।

बताते चलें कि साल 2018 में चीन द्वारा प्लास्टिक कचरे का आयात बंद करने के बाद से एशिया के अन्य देशों में इस तरह का कचरा भारी मात्रा में भेजा जा रहा है। मगर, एशियाई देशों ने भी विकसित देशों से रिसाइक्लिंग के लिए आने वाले कचरे को लेकर सख्त रुख अख्तियार किया है। गत मई में मलेशिया ने 450 टन कचरा वापस भेजने का निर्णय लिया था। गत माह फिलीपींस ने भी कनाडा को 69 कंटेनरों में लदा कचरा वापस भेज दिया था।