येरुशलम। इजरायल में प्रधानमंत्री पद के लिए मंगलवार को चुनाव हो रहे हैं। यह चुनाव बेंजामिन नेतन्याहू के राजनीतिक अस्तित्व को तय करेंगे, जिसमें उनकी राष्ट्रीय राजनीति के 10 साल का वर्चस्व समाप्त हो सकता है या वह नया रिकॉर्ड बना सकते हैं। ओपिनियन पोल में पूर्व सशस्त्र बलों के प्रमुख बेनी गैंट्ज के मध्यमार्गी ब्लू और व्हाइट पार्टी की नेतन्याहू की दक्षिणपंथी लिकुड पार्टी के साथ कांटे की टक्कर होने की उम्मीद जताई गई है। इसमें सुझाव दिया है कि गठबंधन की वार्ता में अति दक्षिणपंथी यिसरेल बेइटिनु पार्टी किंगमेकर के रूप में उभर सकती है।

हालांकि, नेतन्याहू युग के अंत से फिलिस्तीनियों के साथ शांति प्रक्रिया के विवादित मुद्दों पर नीति में एक बड़े बदलाव की संभावना नहीं होगी, जो पांच साल पहले खत्म हो गई थी। पांच महीनों में इजराइल के दूसरे संसदीय चुनाव में दो मुख्य दलों के अभियान कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर केवल संकीर्ण मतभेदों को इंगित करते हैं। इनमें ईरान के खिलाफ क्षेत्रीय संघर्ष, फिलिस्तीनियों और संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ संबंध और स्थिर अर्थव्यवस्था की बात शामिल है।

दरअसल, पिछले चुनाव में किसी भी दल को बहुमत नहीं मिला था। नेतन्याहू की सहयोगी दलों के साथ मिलकर सरकार बनाने की उम्मीदें थीं। मगर, सभी के लिए सेना में नौकरी को अनिवार्य बनाने की मांग करते हुए उनके सहयोगी दल एविग्डोर लिबरमैन ने उन्हें समर्थन देने से मना कर दिया था। इसके बाद ही नेतनयाहू के सरकार बनाने की उम्मीद खत्म हो गई थी।

यह चुनाव उनका राजनीतिक भविष्य तय करेगा। अगर नेतनयाहू को प्रचंड बहुमत मिलता है, तो सत्ता में उनकी वापसी के साथ ही कई कानूनी परेशानियों से उन्हें राहत मिल सकती है। बताते चलें कि नेतन्याहू पर भ्रष्टाचार के कई गंभीर आरोप लगे हैं, लेकिन वह सभी आरोपों को खारिज करते रहे हैं।