मल्टीमीडिया डेस्क। अगर आप सिर्फ एक रात, यहां तक ​​कि सिर्फ एक बार ही जागते हैं, तो मस्तिष्क में एक खास प्रोटीन के स्तर में यह बढोतरी का कारण बनता है, जो अल्जाइमर को ट्रिगर करने का कारण बन सकता है। रातभर जागने से आपकी याददाश्त कमजोर हो सकती है। एक नए अध्ययन में यह बात सामने आई है। शोध में 20 साल के स्वस्थ पुरुषों का अध्ययन किया गया, जो सारी रात नहीं सोए थे और पाया गया कि उनमें ताऊ (tau) का स्तर लगभग पांच गुना तक बढ़ गया था।

वैज्ञानिकों ने लंबे समय से खराब नींद और मस्तिष्क में ताऊ के निर्माण के बीच सीधा संबंध होने की चेतावनी दी है, जो अल्जाइमर का कारण बनती है। मगर, अध्ययन करने वाले स्वीडिश शोधकर्ता इस बात से हैरान थे कि सिर्फ एक रात की नींद नहीं पूरी करना भी कितना हानिकारक हो सकता है। उन्होंने कहा कि उनके शोध को उन छात्रों और कर्मचारियों को एक चेतावनी के रूप में लिया जाना चाहिए, जो किसी कार्य या विश्वविद्यालय की परियोजना को पूरा करने के लिए पूरी रात जागते रहते हैं।

मगर, इस रातभर जागने और दिमाग में ताऊ प्रोटीन के निर्माण की पुष्टि करने के लिए और परीक्षणों की जरूरत है, क्योंकि छोटे अध्ययन ने यह परीक्षण नहीं किया कि प्रतिभागियों के अपने नियमित नींद के पैटर्न में वापस जाने के बाद ताऊ का स्तर सामान्य हुआ था या नहीं। सोते समय शरीर मस्तिष्क से प्लेक्स (plaques) को निकालता है, लेकिन आंखों के बंद नहीं होने पर शरीर को ऐसा करने का मौका नहीं मिलता है।

चैरिटीज का कहना है कि यह वर्तमान में अज्ञात है कि क्या ताऊ में थोड़े समय के लिए बढ़ना अल्जाइमर के विकास का खतरा पैदा कर सकता है। मस्तिष्क में ताऊ के गुच्छे, जिन्हें टैंगल्स और प्लेक कहा जाता है, मस्तिष्क की कोशिकाओं के कामकाज को बाधित करते हैं और अंततः उन्हें मार देते हैं। अल्जाइमर रोग के लक्षण दिखाई देने से दशकों पहले दिमाग में हानिकारक प्रोटीन का निर्माण शुरू हो सकता है जैसे याददाश्त का खोना आदि।

अल्जाइमर से ब्रिटेन में 10 लाख से अधिक लोग और अमेरिका में 57 लाख लोग प्रभावित हैं। यह संख्या बढ़ने की उम्मीद है क्योंकि लोग लंबे समय तक जीवित रहते हैं। अपने नवीनतम अध्ययन में स्वीडन की उप्साला यूनिवर्सिटी (Uppsala University) के शोधकर्ताओं ने 22 की औसत आयु वाले 15 पुरुषों पर नजर रखी। सभी प्रतिभागियों ने नियमित रूप से हर रात सात से नौ घंटे की अच्छी नींद लेने की सूचना दी।

पुरुषों को दो दिनों और रातों के लिए एक स्लीप क्लिनिक में सख्त भोजन और गतिविधि कार्यक्रम के तहत रखा गया। शाम और फिर सुबह उनके खून के नमूने लिए गए। उनमें से आधे लोगों को दोनों रातों को अच्छी नींद लेने की अनुमति थी। वहीं, बाकी प्रतिभागियों को एक रात अच्छी नींद लेने दिया गया और दूसरी पूरी रात जगने के लिए मजबूर किया गया।

प्रतिभागियों को बिस्तर पर बैठकर गेम खेलने, फिल्में देखने या बातचीत करने दी गई और इस दौरान लाइट जलती रही। शोधकर्ताओं ने पाया कि पुरुषों की रात में नींद की कमी के बाद उनके रक्त में ताऊ के स्तर में औसतन 17 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि एक अच्छी रात के आराम के बाद यह महज दो प्रतिशत थी।

अध्ययन के लेखक डॉक्टर जोनाथन सेडरनेस ने कहा- हमारे अध्ययन से पता चलता है कि युवा, स्वस्थ व्यक्तियों के सिर्फ एक रात की नींद पूरी नहीं होने की वजह से खून में ताऊ का स्तर बढ़ जाता है, जिससे यह पता चलता है कि समय के साथ इस तरह की नींद की कमी का हानिकारक असर पड़ सकता है। डॉक्टर जोनाथन ने कहा कि भविष्य में इस तरह के अध्ययनों को करने की जरूरत है कि ताऊ का स्तर कितने समय तक अधिक बना रहता है और आखिर में यह कब अल्जाइमर का नेतृत्व करता है।

उन्होंने कहा कि इस तरह के अध्ययन इस बात की महत्वपूर्ण जानकारी दे सकते हैं कि क्या कम उम्र में नींद को बाधित करने वाले कारणों को खत्म करके किसी व्यक्ति में डिमेंशिया या अल्जाइमर के विकास के जोखिम को कम कर सकते हैं।

Posted By: Shashank Shekhar Bajpai

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