लंदन। ब्रिटेन के बर्मिंघम यूनिवर्सिटी की लाइब्रेरी में दुनिया की सबसे पुरानी कुरान की पांडुलिपि मिली है। इसके कुछ हिस्से करीब 1370 साल पुराने और पैगंबर मोहम्मद के काल के करीब के बताए जा रहे हैं। कहा जाता है कि जानवर के चर्मपत्र पर लिखी गई कुरान की इस पाण्डुलिपि में कुरान के 18-20वें अध्याय का हिस्सा है, जो स्याही से प्रारंभिक अरबी लिपि में लिखी गई।

हालांकि, कुछ इतिहासकारों का कहना है‍ कि पांडुलिपि मोहम्‍मद साहब के काल से पहले की है। इतिहासकारों का मानना है कि इसके जरिये इस्‍लाम के शुरुआती इतिहास को फिर से लिखा जा सकता है। इसे लिखने वाला संभवत: पैगंबर मोहम्मद साहब को जानने वाला था।

डेली मेल में प्रकाशित एक खबर के अनुसार, यूनिवर्सिटी ने बताया कि कार्बन डेटिंग की जांच से पता चलता है कि कुरान का टुकड़ा 568 से 645 एडी का है। इसके अनुसार, माना जा रहा है कि यह दुनिया की सबसे पुरानी कुरान है। गौरतलब है‍ कि पैगंबर मोहम्मद साहब का काल 570 से 632 एडी का माना जाता है।

इतिहासकार टॉम हॉलैंड बताते हैं कि इस कुरान के मिलने के बाद यह उन स्‍थापित तथ्‍यों को नकारती है, कि हम कुरान की उत्‍पत्‍ित के बारे में निश्‍िचतौर पर कुछ भी जान सकते हैं। डेली मेल की खबर के अनुसार, यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्‍सफोर्ड के बॉडलिएन लाइब्रेरी के कीथ स्‍माल ने कहा कि इस कुरान के मिलने से इस बात के अधिक आधार मिले हैं कि मोहम्‍मद साहब और उनके शुरुआती अनुयायी पहले से ही मौजूद लेख का इस्‍तेमाल अपने राजनीतिक और धार्मिक एजेंडा को आकार देने के लिए कर रहे थे, बजाय इसके कि मोहम्‍मद साहब ने जन्‍नत से सुनी थीं।

हालांकि, इन दावों का मुस्लिम स्‍कॉलर्स ने पुरजोर विरोध किया। स्‍कूल ऑफ ओरिएंटल एंड अफ्रीकन स्‍टडीज इन लंदन के मुस्‍तफा शाह ने बताया कि माना जाता है कि मुहम्‍मद साहब ने इस्‍लाम की स्‍थापना 610 एडी में कभी की थी। पहला मुस्लिम समुदाय महीना में 622 एडी में बना था।

इस समय तक कुरान याद की जाती थी और मौखिक रूप से दोहराई जाती थी। मगर, मुस्लिम समुदाय के पहले नेता खलीफा अबु बकर ने मुहम्‍मद साहब की मौत के बाद कुरान की सामग्रियों को किताब में संग्रहित करने का आदेश दिया। मगर, 650 एडी तक तीसरे खलीफा के काल तक अंतिम अधिकृत लेखन पूरा नहीं हो पाया था।

Posted By: Shashank Shekhar Bajpai

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