लंदन। London Bridge Attack : ब्रिटेन में चुनाव से दो हफ्ते पहले ही अचानक से आतंकवाद का मुद्दा सारे मुद्दों पर भारी पड़ता नजर आ रहा है। शुक्रवार को लंदन ब्रिज पर हुए चाकू से हमले के बाद देशभर में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। जगह-जगह पर सख्ती से सभी जांच की जा रही है। पुलिस ने रविवार को औपचारिक रूप से पूर्वी इंग्लैंड में कैम्ब्रिजशायर के 25 वर्षीय जैक मेरिट और वेस्ट मिडलैंड्स में वारविकशायर में रहने वाली 23 वर्षीय सास्किया जोन्स की पहचान मारे गए पीड़तों के रूप में उजागर की है।

हमले में तीन लोग घायल हुए थे, जिन्होंने उसे रोकने लिए जान की बाजी लगा दी थी। हॉस्पिटल स्टाफ ने बताया कि हमले में घायल एक शख्स को छुट्टी दे दी गई है, जबकि दो घायलों की हालत स्थिर होने तक वे अस्पताल में ही रहेंगे। लोग इन हीरो की तारीफ कर रहे हैं, जिनकी बहादुरी की वजह से हमलावर को पुलिस ढेर कर पाई अन्यथा और बड़ी घटना घट जाती।

शनिवार को पुलिस ने उस्मान से संबंधित बताए जा रहे सेंट्रल लंदन के दो घरों की तलाशी लेने के बाद कहा कि उस्मान ने इस हमले को अकेले ही अंजाम दिया था और उसे किसी की मदद की जरूरत नहीं थी। हालांकि, आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट ने इस हमले की जिम्मेदारी लेकर मामले को गंभीर बना दिया है।

इस बीच ब्रिटेन में 12 दिसंबर को होने वाले चुनावों से पहले खान का मामला लगातार राजनितिक चर्चा का केंद्र बना हुआ है। कन्जर्वेटिव नेता बोरिस जॉनसन ने आरोप लगाया है कि लेबर पार्टी की सरकार ने साल 2008 में कानून को बदल दिया था, जिसके चलते अपराधियों की जल्द रिहाई हो सकती थी। उन्होंने वादा किया कि यदि उनकी सरकार बनती है, तो वह आतंकियों की जल्द रिहाई को खत्म कर देंगे। साथ ही ऐसे मामलों में दोषी ठहराए गए लोगों के लिए कम से कम 14 साल की सजा और कुछ गंभीर दोषियों के लिए यह सुनिश्चित करेंगे कि वे कभी जेल से रिहा न हो सकें।

पीएम बोरिस जॉनसन ने कहा कि हमलावर उस्मान खान की तरह ही आतंकवाद से जुड़े मामलों में दोषी ठहराए गए कम से कम 74 कैदियों को समय से पहले दिसंबर रिहा कर दिया गया है। सिक्योरिटी सर्विस अब उन दोषी ठहराए गए आतंकियों पर निगरानी बढ़ा रही है। इसके बाद चेकिंग बढ़ा दी गई है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उनसे कोई खतरा नहीं है।

बताते चलें कि शुक्रवार को 28 वर्षीय उस्मान खान ने दो लोगों की चाकू मारकर हत्या कर दी थी। पीएम ने कहा कि हमने बीते 48 घंटों में बहुत से कदम उठाए हैं, जिनके बारे में आप कल्पना कर सकते हैं। ब्रिटेन में जन्मे उस्मान आठ सदस्यीय नेटवर्क का हिस्सा था, जो अल-कायदा से प्रेरित थे। उसे साल 2012 में लंदन स्टॉक एक्सचेंज में बम लगाने की साजिश रचने के आरोप में आठ साल की जेल की सजा हुई थी।

कोर्ट ऑफ अपील ने साल 2013 में उसकी सजा को खारिज कर 21 साल की जेल की नई सजा सुनाई थी, जिसमें 16 साल की कस्टोडियल सजा और पांच साल की सशर्त रिहाई शामिल थी। वह दिसंबर 2018 में जेल से रिहा हुआ था और इलेक्ट्रॉनिक टैग पहनाकर उनकी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी। वह मुंबई में हुए 26/11 के हमले की तरह ही ब्रिटिश संसद पर हमला करने के साथ ही तत्कालीन ब्रिटिश मेयर बोरिस जॉनसन की हत्या भी करना चाहता था।

बताते चलें कि लंदन में इससे दो साल पहले आतंकी हमला हुआ था, जिसमें लंदन ब्रिज पर पैदल यात्रियों पर आतंकियों ने कार चढ़ा दी थी। इसके बाद चाकू से लोगों पर हमला किया गया था, जिसमें आठ लोगों की मौत हो गई थी और 48 घायल हो गए थे।

Posted By: Shashank Shekhar Bajpai