हांगकांग। वायु प्रदूषण के कारण भी डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है। चीन में हाल में हुए एक शोध से यह बात सामने आई है। शोधकर्ताओं का दावा है कि वायु प्रदूषण और डायबिटीज के बीच सीधा संबंध है। लंबे समय तक प्रदूषित हवा से डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है।

शोध के दौरान पाया गया कि हवा में पीएम 2.5 की मात्रा बढ़ने पर लोगों में डायबिटीज का खतरा 16 फीसद बढ़ जाता है। हवा में मौजूद पीएम 2.5 प्रदूषण पैदा करने वाला सबसे खतरनाक कण होता है। अत्यंत सूक्ष्म होने की वजह से यह फेफड़ों के कैंसर का भी कारण बनता है।

वायु प्रदूषण के कारण डायबिटीज को लेकर पड़ने वाले प्रभाव के अध्ययन के लिए 15 प्रांतों से 88 हजार सैंपल लिए गए थे। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, 2016 में डायबिटीज की वजह से करीब 16 करोड़ लोगों की मौत हुई थी। भारत जैसे विकासशील देश के लोग इस बीमारी का सबसे ज्यादा शिकार हो रहे हैं।

दुनियाभर में हर चार में से एक मौत के लिए प्रदूषण जिम्मेदार

दुनियाभर में होने वाली चौथाई असमय मौतों और बीमारियों के लिए प्रदूषण और पर्यावरण को होने वाला नुकसान जिम्मेदार है। ग्लोबल एन्वायरन्मेन्ट आउटलुक (जीईओ) की रिपोर्ट पर संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि स्मॉग, पीने के पानी में हो रहा रासायनिक प्रदूषण और पारिस्थितिकी तंत्र के विनाश से कई महामारी फैल रही है, जिससे अरबों लोग प्रभावित हो रहे हैं।

70 देशों के 250 वैज्ञानिकों द्वारा छह साल में तैयार की गई रिपोर्ट के अनुसार जलवायु परिवर्तन व कार्बन डाइआक्साइड जैसे ग्रीन हाउस गैसों का बढ़ने से पूरे विश्व का भविष्य खतरे में है। वायु प्रदूषण के कारण सालभर में 60 से 70 लाख लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ रही है। साल 2015 में करीब 90 लाख लोगों की मौत हुई थी। पीने का साफ पानी उपलब्ध न होने से डायरिया जैसी बीमारियों से भी हर साल 14 लाख लोगों की मौत हो रही है।

रिपोर्ट में पेरिस समझौते के लक्ष्य को पूरा करने के लिए कोई रूपरेखा तैयार नहीं होने पर भी चिंता जताई गई है। 2015 में हुए समझौते में करीब 195 देशों ने 2030 तक पृथ्वी के तापमान को दो डिग्री से अधिक न बढ़ने देने के लिए कार्बन उत्सर्जन में कटौती करने का संकल्प लिया था। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि पर्यावरण सुरक्षा के लिए सभी देशों को समान रूप से योगदान करना होगा।