पेरिस। भारत मिशन चंद्रयान को सौ फीसदी सफल बनाने से भले ही चूक गया हो लेकिन अब इस मिशन को लेकर दुनिया भर की स्पेस एजेंसी ISRO की जमकर तारीफ कर रही हैं। यूरोपियन स्पेस एजेंसी (ESA) ने भी माना है कि चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर लैंडिंग करना बेहद मुश्किल काम है।

बता दें कि ISRO द्वारा चांद के दक्षिणी ध्रुव पर भेजे गए विक्रम लैंडर की सॉफ्ट लैंडिंग नहीं हो सकी थी। हालांकि ऑर्बिटर की मदद से विक्रम लैंडर को लोकेट कर लिया गया है, लेकिन अब तक ISRO के वैज्ञानिक उससे संपर्क नहीं साध पाए हैं।

बता दें कि ISRO की तरह ही यूरोपियन स्पेस एजेंसी (ESA) ने भी चांद के दक्षिणी ध्रुव पर मिशन भेजने की योजना बनाई थी जिसे 2018 में भेजा जाना था लेकिन फंड की कमी की वजह से एजेंसी को ये प्रोजेक्ट छोड़ना पड़ा था।

ESA ने इसकी प्लानिंग स्टेज में एक रिपोर्ट तैयार की थी जिसमें वहां लैंडिंग में आने वाली परेशानियों का जिक्र किया था। जो बाद में सार्वजनिक कर दी गई थी। उस रिपोर्ट के मुताबिक 'चांद के दक्षिणी ध्रुव की सतह का जटिल वातावरण है। जहां विकिरण और चार्ज्ड पार्टिकल्स मिलकर फाइन डस्ट तैयार करते हैं। हां के नतीजे आश्चर्यजनक, अनिश्चित और हानिकारक हो सकते हैं।'

चांद की धूल उपकरणों पर चिपक सकती है जिससे उसमें मैकेनिकल समस्या आ सकती है। ये धूल सोलर पैनल को भी कवर कर सकती है। इसके साथ उसकी कार्यक्षमता भी कम हो सकती है।

ESA वर्तमान में कनाडा और जापान की स्पेस एजेंसी के साथ पार्टनरशिप कर रोबोटिक मिशन पर काम कर रहा है जो चांद के दक्षिणी ध्रुव पर साल 2020 के मध्य या अंतिम चरण में मिशन भेजेगा।

बता दें कि इसके पूर्व नासा (NASA) ने भी चांद के दक्षिणी ध्रुव पर भारत द्वारा चंद्रयान 2 भेजने की जमकर तारीफ की थी।