लंदन। धरती पर भले ही 4जी नेटवर्क हर किसी की जद में न हो, लेकिन साल 2019 तक चंद्रमा पर 4जी नेटवर्क मिलने लगेगा। टेलीकॉम कंपनी वोडाफोन अगले साल तक मोबाइल कंपनी नोकिया की मदद से चंद्रमा पर 4जी नेटवर्क मुहैया कराने की योजना बना रही है।

यह ऐतिहासिक घटना इंसान के चंद्रमा पर 50 साल बाद कदम रखने के मौके पर होने जा रही है। गौरतलब है कि नासा के अंतरिक्षयात्री नील आर्मस्ट्रॉन्ग ने 50 साल पहले चंद्रमा की सतह पर कदम रखा था। इस प्रोजेक्ट पर वोडाफोन और नोकिया बर्लिन की स्पेस एक्सप्लोरेशन कंपनी पीटीसाइंटिस्ट्स के साथ काम कर रही हैं।

इस कदम से साइंटिफिक डेटा को जमा करने और उसे धरती पर भेजने में आसानी हो सकेगी। बर्लिन के पीटीसाइंटिस्ट्स के फाउंडर और सीईओ रॉबर्ट बोम ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह पहला प्राइवेट फंडेड मून लेंडिंग मिशन है, जो अंतरिक्ष खोज का भविष्य तय करेगा।

5जी पर चल रहा है ट्रायल

रॉबर्ट बोम ने बताया कि यह मून मिशन कैप केनवेरल से स्पेसएक्स फॉल्कन9 रॉकेट से 2019 में लॉन्च होगा। इस नेटवर्क के जरिए चांद की सतह से धरती पर हाई-डेफिनिशन स्ट्रीमिंग संभव हो सकेगी। इसके लिए करीब एक किलो वजन का छोटा हार्डवेयर तैयार किया जाएगा। वोडाफोन ने बताया कि चांद पर अभी 5G की बजाय 4G नेटवर्क शुरू किया जाएगा। 5G को लेकर अभी टेस्ट और ट्रायल चल रहा है।

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पांच करोड़ डॉलर होंगे खर्च

रॉबर्ट बोम ने बताया कि इस पूरे मिशन पर करीब पांच करोड़ डॉलर का खर्च आएगा। वोडाफोन चंद्रमा से 1800 मेगाहर्ट्ज के फ्रीक्वेंसी बैंड पर 4जी नेटवर्क का परीक्षण कर रहा है, ताकि चंद्रमा की सतह की लाइव फुटेज धरती तक आसानी से पहुंच सकें। पीटीसाइंटिस्ट्स का यह प्रोजेक्ट 11 दिनों का होगा क्योंकि धरती और चंद्रमा के तापमान में काफी अंतर है।

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