दो महीने के दौरान बोत्सवाना में 350 से अधिक हाथियों की रहस्यमयी मौतों ने वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं को हैरान कर दिया है। हाथियों के शवों को अफ्रीकी राष्ट्र के उत्तर-पश्चिमी हिस्सों के आस-पास के इलाके में मिले हैं। उनके शवों पर कोई भी ऐसा चोट का निशान नहीं मिला है, जिससे पता चल सके कि उनका अवैध शिकार किया गया था। आगे की जांच में भी इंसानों द्वारा जहर देने की बात को खारिज किया गया है। बोत्सवाना के इस इलाके में वन्यजीवों को मारने के लिए एंथ्रेक्स नाम के जहर का इस्तेमाल किया जाता है।

क्षेत्रीय वन्यजीव समन्वयक दीमाकात्सो नत्शेबे ने बताया कि हम अभी भी हाथियों की मौत के सही कारण को पता करने के लिए नतीजों की प्रतीक्षा कर रहे हैं। अफ्रीका में हाथियों की घटती आबादी में उनका एक तिहाई हिस्सा बोत्सवाना की जमीन पर है। ब्रिटेन स्थित चैरिटी नेशनल पार्क रेस्क्यू के डॉ नियाल मैककैन ने आशंका जाहिर की है कि कुछ लोग हाथियों के न्यूरोलॉजिकल सिस्टम पर हमला कर रहे हों।

हाथियों की मौत उस वक्त हो रही है, जब COVID-19 महामारी के बीच दुनिया भर में लाखों लोगों की मौत हो चुकी है। इतना ही नहीं यह महामारी अभी भी काबू में आती नहीं दिख रही है। यह देखने के लिए अपर्याप्त डेटा है कि क्या हाथी को मारने वाली कोई चीज मानव आबादी के लिए भी खतरा पैदा कर सकती है। अवैध शिकार के कारण अफ्रीका की कुल हाथी आबादी घट रही है, लेकिन महाद्वीप के एक तिहाई हाथियों के निवास स्थान बोत्सवाना ने 1990 के दशक के अंत में हाथियों की संख्या में जबरदस्त इजाफा हुआ है।

वहां हाथियों की संख्या 80,000 से बढ़कर एक लाख 30 हजार तक पहुंच गई है। इसकी बड़ी वजह शिकार पर लगाया गया अच्छा प्रतिबंध है। हालांकि, किसान उन हाथियों के बढ़ते उपद्रव से परेशान होते हैं, जिनकी फसलें दक्षिणी अफ्रीकी देश में नष्ट कर दी गई हैं।

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Ram Mandir Bhumi Pujan
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