इस्लामाबाद। पाकिस्तान में सत्ता से हटाए गए प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और उनके चार परिजनों के देश छोड़ने पर प्रतिबंध लग सकता है। पाकिस्तान की भ्रष्टाचार रोधी संस्था राष्ट्रीय जवाबदेही बोर्ड (एनएबी) ने बाहर जाने वालों पर नियंत्रण की सूची (ईसीएल) में उनके नाम डालने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। शरीफ और उनके कुछ परिजन पनामा पेपर्स मामले में मुकदमे का सामना कर रहे हैं।

अखबार डॉन के मुताबिक, लाहौर के एनएबी ने इस्लामाबाद स्थित अपने मुख्यालय को हुसैन और हसन को ईसीएल में शामिल करने के लिए पत्र लिखा है। इस्लामाबाद में एनएबी प्रवक्ता ने कहा कि एनएबी लाहौर ने नवाज, मरयम और सफदर के नाम भी ईसीएल में डालने की सिफारिश की है। इससे पहले कोर्ट ने पेश नहीं होने पर हुसैन और हसन को भगोड़ा घोषित कर दिया था।

प्रक्रिया के अनुसार पहले ब्रिटेन में रह रहे शरीफ के दोनों बेटों के नाम को ईसीएल में शामिल किया जाएगा। इसके बावजूद वे कोर्ट में पेश नहीं हुए तो उनके पासपोर्ट रद करने का अनुरोध किया जाएगा। इसी तरह एनएबी ने वित्त मंत्री इशाक डार के खिलाफ वारंट जारी होने पर उनका नाम ईसीएल में डालने के लिए गुरुवार को गृह मंत्रालय से अनुरोध किया था। वह भी कई बार कोर्ट में पेश नहीं हुए थे।

डार ने इस्तीफा नहीं दिया-

इस बीच पाकिस्तान सरकार ने कहा कि वित्त मंत्री डार से इस्तीफा नहीं दिया है। लेकिन नियम के अनुसार उनका मंत्रालय प्रधानमंत्री के नियंत्रण में है। पनामा पेपर्स मामले में आरोप तय होने के बाद उनके इस्तीफे की चर्चा चल रही थी। 22 सितंबर को कोर्ट ने डार पर अभियोग लगाया था।

अभियान टला-

पाकिस्तान के प्रशासन ने कट्टरपंथी मौलवियों के नेतृत्व में इस्लामाबाद में दो व्यस्त राजमार्गों को जाम करने वाले प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अभियान और 24 घंटे तक टाल दिया है। प्रदर्शनकारियों को शांतिपूर्वक हटने के लिए शनिवार सुबह तक का समय दिया गया था। कानून मंत्री जाहिद हामिद को बर्खास्त करने की मांग को लेकर करीब दो हफ्ते से रास्ता जाम लगाया गया है।

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