एम्सटर्डम। न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री जैसिंडा अर्डेन ने हिंसक चरमपंथी सामग्री को ऑनलाइन फैलने से रोकने के लिए अधिक धन और समर्थन देने की सोमवार को घोषणा की। इसके कुछ ही महीनों पहले एक कथित गोरे वर्चस्ववादी ने क्राइस्टचर्च की दो मस्जिदों पर ऐसी ही हिंसक चरमपंथी सामग्री से प्रेरित होकर नरसंहार किया था। दो मस्जिदों में 15 मार्च को किए गए हमले में 51 मुस्लिमों की मौत हो गई थी। हमलावर ने फेसबुक पर इस घटना का सीधा प्रसारण किया था और घटना के वीडियो ट्विटर, यूट्यूब और फेसबुक के स्वामित्व वाले ऐप व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम पर साझा किए गए थे।

अर्डेन ने कहा कि उनकी सरकार चार साल में 10.73 मिलियन डॉलर से अधिक निवेश कर रही थी, ताकि आतंकवादी और हिंसक चरमपंथी सामग्री को जल्दी से खोजने और उन्हें फैलने से रोकने की न्यूजीलैंड की क्षमता को बढ़ाया जा सके। एक संवाददाता सम्मेलन में पीएम ने कहा कि इस राशि के इस्तेमाल से गृह मंत्रालय के फॉरेंसिक, इंटेलीजेंस की जांच करने और रोकथाम के काम करने की क्षमता दोगुनी हो जाएगी।

सरकार ने एक बयान में कहा कि इस काम के लिए 17 लोगों की एक नई टीम लगाई जाएगी, जो ऑनलाइन फैलने वाली हिंसक चरमपंथी कंटेंट से निपटने के लिए समर्पित होगी। नए विभाग को यह अधिकार होगा कि वह इस तरह के काम में शामिल लोगों की जांच कर सकें और उनके खिलाफ मुकदमा चला सकें। इसके लिए वे अंतरराष्ट्रीय और घरेलू साझेदारों के साथ मिलकर प्रोएक्टिव डिटेक्शन कर सकेंगे।

न्यूजीलैंड की पीएम ने कहा- हमारी ऑनलाइन दुनिया अच्छे कामों के लिए एक ताकत होनी चाहिए, जहां हम विचारों को साझा कर सकते हैं, प्रौद्योगिकी साझा कर सकते हैं और न्यूजीलैंड के निवासियों को आपत्तिजनक सामग्री से बचा सकते हैं। उन्होंने कहा कि 15 मार्च के आतंकवादी हमलों के बाद हिंसक ऑनलाइन चरमपंथ का मुकाबला करना हमारी प्रतिक्रिया के रूप में एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

Posted By: Shashank Shekhar Bajpai