Afghanistan Crisis: अफगानिस्‍तान में तालिबान के शासन और मौजूदा हालात पर दुनिया के 21 देशों ने चिंता जताई है। अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा समेत 21 देशों ने एक संयुक्त बयान में कहा कि हम अफगानी महिलाओं और लड़कियों, उनके शिक्षा, काम और आवाजाही की स्वतंत्रता के अधिकारों के बारे में बहुत चिंतित हैं। हम अफगानिस्तान में सत्ता और अधिकार के पदों पर बैठे लोगों से उनकी सुरक्षा की गारंटी देने का आह्वान करते हैं। उन्होंने अफगानिस्तान को सभी तरह की मानवीय सहायता देने का भरोसा दिलाया। साथ ही छिपे शब्दों में चेतावनी भी दी कि हम मौजूदा हालात पर कड़ी नजर रख रहे हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि नई सरकार महिलाऔ और आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए सभी जरुरी कदम उठायेगी।

उधर, तालिबान ने सरकार के गठन का काम शुरू कर दिया है। तालिबान के प्रवक्ता जबीउल्ला मुजाहिद को तालिबान सरकार में संस्कृति एवं सूचना मंत्री बनाया गया है। मुजाहिद ने ही एक दिन पहले मीडिया को संबोधित करते हुए बताया था कि तालिबान की सरकार कैसी होगी। ऐसा पहली बार हुआ, जब मुजाहिद दुनिया के सामने आए। क्योंकि वह दशकों से पर्दे के पीछे छिपकर काम करते रहे थे। उन्होंने इस्लामी कानून के तहत महिलाओं के अधिकारों का सम्मान करने का वादा किया था और विरोधियों को भी आम माफी का ऐलान किया था। माना जा रहा है कि यह सिर्फ विश्व के नेताओं और डरे हुए लोगों को दिखाने का प्रयास है कि तालिबान अब बदल गया है।

मुजाहिद ने कहा कि उनकी किसी से दुश्मनी नहीं है और अपने नेता के आदेश के आधार पर उन्होंने सभी को माफ कर दिया है। हम सभी देशों को भरोसा देते हैं कि हम आपके दूतावास और लोगों की सुरक्षा करेंगे। जबीहुल्ला मुजाहिद ने ये भी भरोसा दिलाया कि हम अपनी मिट्टी का इस्तेमाल किसी दूसरे देश के लिए नहीं होने देंगे। ना ही अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल किसी दूसरे देश के खिलाफ होने देंगे।

वहीं, अफगानिस्तान में कब्जे के बाद तालिबान का आतंक जारी है। अफगानिस्तान के राष्ट्रीय झंडे को दफ्तरों पर लगाए रखने की मांग की जा रही थी। इस दौरान तालिबानी लड़ाकों ने प्रदर्शनकारियों पर गोलियां बरसाना शुरू कर दिया, जिसमें दो लोगों की मौत हो गई और 12 लोग घायल हो गए।

Posted By: Shailendra Kumar