इस्लामाबाद। आतंकवाद को पनाह देने वाले पाकिस्तान की मुश्किलें दिन पर दिन बढ़ती जा रही है। अब उस पर फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की ब्लैक लिस्ट में आने का खतरा मंडराने लगा है। FATF द्वारा फिलहाल पाक को ग्रे लिस्ट में डाल रखा है और उससे बाहर आने के लिए पाकिस्तान को FATF द्वारा दिए गए 27 बिंदुओं के एक्शन प्लान पर अमल करना था, लेकिन वह उसका भी पालन करने में पूरी तरह से नाकाम साबित हो रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक FATF की टेरर फंडिंग पर नजर रखने वाली विंग के सामने आया है कि पाकिस्तान ने 27 बिंदुओं में से सिर्फ 6 बिंदुओं पर ही अमल करते हुए कार्रवाई की है।

फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) पाकिस्तान को अगर ब्लैक लिस्ट में डाल देता है तो उसकी अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से मिलने वालेी आर्थिक मदद पूरी तरह से बंद हो जाएगी। अक्टूबर में FATF द्वारा पेरिस में होने वाली मीटिंग में उसके स्टेटस का रिव्यू किया जाएगा।

FATF का होता है यह उद्देश्य

फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) का उद्देश्य मनी लान्ड्रिंग, टेरर फंडिंग और अन्य आर्थिक मसलों को लेकर मानक तय करना और उनका प्रभावी तरीके से क्रियान्वयन कराना होता है। इसमें लीगल, रेग्यूलेटरी और ऑपरेशनल मेजर्स भी शामिल होते हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान द्वारा लागू किए जा रहे FATF के एक्शन प्लान पर नजर रखने वाली टीम के अनुसार यूएन द्वारा घोषित किए गए 100 से ज्यादा आतंकियों में से पाकिस्तानी सरकार ने अब तक सिर्फ 5 की ही उनके देश में होने की पहचान करते हुए लोकेट किया है।

अब भारत की नजर भी अगले महीने होने वाली FATF की रिव्यू मीटिंग पर लगी हुई है। इस मीटिंग के निर्णय के आधार पर ही पाकिस्तान का आर्थिक भविष्य तय होगा।