इस्लामाबाद। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था इन दिनों किस हालत से गुजर रही है, यह किसी से छिपा नहीं है। पीएम इमरान खान देश चलाने के लिए दुनियाभर में पैसे मांगते घूम रहे हैं। हाल ही में वह अमेरिका का दौरा करके लौटे हैं। आईएमएफ ने बड़ी मुश्किल से और कई शर्तों के साथ बेल-आउट पैकेज दिया है। मगर, भारत के चंद्रयान-2 मिशन को देखकर पाकिस्तान के सीने में सांप लोट गया है।

आनन-फानन में पाकिस्तान ने गुरुवार को घोषणा की वह साल 2022 में अंतरिक्ष में अपना पहला अंतरिक्ष यात्री भेजेगा। गुरुवार को पाकिस्तान के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री फवाद चौधरी ने कहा कि अंतरिक्ष मिशन के लिए अंतरिक्ष यात्री के चयन की प्रक्रिया फरवरी 2020 से शुरू की जाएगी। इसके साथ ही ट्विटर पर उनका मजाक उड़ाना शुरू हो गया है।

चौधरी ने एक ट्वीट में कहा कि यह घोषणा करते हुए गर्व महसूस कर रहा हूं कि अंतरिक्ष में पहले पाकिस्तानी को भेजे जाने की चयन प्रक्रिया फरवरी 2020 में शुरू की जाएगी। इसके लिए 50 लोगों की एक सूची तैयार की जाएगी।

इसके बाद सूची के नामों को घटाकर 25 किया जाएगा और 2022 में हम अपने पहले व्यक्ति को अंतरिक्ष में भेजेंगे। यह हमारे देश का सबसे बड़ा अंतरिक्ष कार्यक्रम होगा। उन्होंने बताया कि पाकिस्तानी वायुसेना अंतरिक्ष मिशन के लिए अंतरिक्ष यात्री की चयन प्रक्रिया में मुख्य भूमिका निभाएगी।

चौधरी ने कहा कि मिशन के लिए शुरू में 50 पायलटों का चयन किया जाएगा और इसके बाद इस संख्या को 25 और फिर 10 पर लाया जाएगा। इन 10 पायलटों को प्रशिक्षण दिया जाएगा और इनमें से एक को अंतरिक्ष में भेजा जाएगा।

इसके साथ ही ट्विटर पर पाकिस्तानी दावे की खिंचाई होने लगी है। कुछ लोगों ने कहा कि मिशन कैसे भेजोगे, चीन के पैसे से। वहीं, एक यूजर ने लिखा- कि अगर अंतरिक्ष यात्री को वापस न बुलाना हो, तो हाफिज सईद को भेज दो।

पाकिस्तान ने अब तक चीनी लॉन्च व्हीकल की मदद से ऑर्बिट में दो सैटेलाइट लॉन्च किया है। बताते चलें कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के Chandrayaan-2 की सफल लॉन्चिंग के बाद पूरी दुनिया भारतीय वैज्ञानिकों की क्षमता की तारीफ कर रहे हैं। नासा ने भी इसरो को बधाई दी है। भारत ने इस मिशन के लिए क्रायोजेनिक इंजन का इस्तेमाल किया है, जिसे पूरी तरह भारत में ही विकसित किया गया है। इस इंजन की टेक्नोलॉजी को देने से अमेरिका, फ्रांस और जापान ने मना कर दिया था, जिसके बाद इसरो के वैज्ञानिकों ने करीब 25 साल तक लगातार मेहनत की और देश में ही विकसित किया।

Posted By: Shashank Shekhar Bajpai