जिनेवा। लंबे समय से धर्मांतरण की मार झेल रहे यूरोपीय ईसाइयों ने अब मोर्चा खोल दिया है। इसके चलते उन्‍होंने जिनेवा में पैदल मार्च निकाला। उनका कहना है कि वे पहले ही अल्‍पसंख्‍यक थे, अब धर्मांतरण के बाद उनकी संख्‍या और घट रही है।

इन बातों पर उठाई आवाज़

यूरोप में रह रहे पाकिस्तानी ईसाइयों ने पाकिस्तान में समान अधिकारों की मांग करते हुए शनिवार को जिनेवा में बड़ी संख्या में एकत्रित होकर विरोध मार्च निकाला। उन्होंने पाकिस्तान में ईशनिंदा कानून, ईसाई व हिंदू लड़कियों के जबरन धर्मांतरण और शिक्षा के अभाव के खिलाफ आवाज बुलंद की।

प्रदर्शनकारियों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे। विरोध मार्च पालेस विल्सन स्थित संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायोग से शुरू हुआ और ब्रोकेन चेयर स्थित संयुक्त राष्ट्र कार्यालय पर खत्म हुआ। बाद में विरोध प्रदर्शन में यूरोपीय संसद के सदस्य और अन्य मानवाधिकार कार्यकर्ता भी शामिल हुए।

नेताओं का कहना है

पाकिस्तानी ईसाई नेता रॉबिनसन असगर ने कहा कि पाकिस्तान में ईसाई लड़कियों को चीनियों द्वारा जबरन वेश्यावृत्ति में धकेला जा रहा है। वे (चीनी) वहां आते हैं और गरीब ईसाई परिवारों को कुछ पैसे देकर उनकी लड़कियों को अपनी पत्नी के तौर पर ले जाते हैं। बाद में उनसे वेश्यावृत्ति कराते हैं।

यहां से हुई थी शुरुआत

कनाडाई संसद के पूर्व सदस्य मारियो सिल्वा ने कहा कि पाकिस्तान में ईशनिंदा कानून ईसाई, हिंदू और अहमदियो जैसे अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने के लिए बनाया गया था ताकि उनका जबरन इस्लाम में धर्मांतरण कराया जा सके।

घट रही है संख्‍या

यूरोपीय संसद के सदस्य हर्व जुविन ने कहा कि कुछ साल पहले तक पाकिस्तान में ईसाई, शिया और हिंदू अल्पसंख्यक करीब 15 फीसद थे जो अब घटकर सिर्फ तीन फीसद रह गए हैं। यह स्थिति साल दर साल और खराब हो रही है।