इस्लामाबाद। पाकिस्तान की सक्रिय राजनीति में एक बार फिर से उतरने की कोशिश कर रहे पूर्व तानाशाह और राष्ट्रपति रहे परवेज मुशर्रफ को इस्लामाबाद उच्च न्यायालय से झटका लगा है। कोर्ट ने उनकी उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ के खिलाफ आतंकवाद के आरोपों को हटाने और न्यायाधीशों को हिरासत में लिए जाने के मामले को आतंकवाद निरोधी कोर्ट (एटीसी) से सत्र न्यायालय में स्थानांतरित करने की मांग की गई थी।

डॉन इस्लामाबाद की खबर के अनुसार, इस्लामाबाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने बुधवार को परवेज मुशर्रफ के वकील अख्तर शाह के हवाले से दायर की गई याचिका की सुनवाई फिर से शुरू की। इस पीठ में मुख्य न्यायाधीश अतहर मिनाला और न्यायमूर्ति मियांगुल हसन औरंगजेब शामिल थे। पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान शाह के बार-बार अनुपस्थित रहने के कारण याचिका को खारिज कर दिया।

पूर्व राष्ट्रपति पाकिस्तान पीनल कोर्ट के तहत दर्ज की गई एफआईआर के आधार पर अपने ऊपर लगाए गए आतंकवाद के आरोपों को हटाने और अपने मामले की सुनवाई को एटीसी से सत्र न्यायालय में ट्रांसफर करवाना चाहते हैं। बताते चलें कि तीन नवंबर 2007 को मुशर्रफ ने देश में आपातकाल लगाने की घोषणा की थी और इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के 60 न्यायाधीशों को हिरासत में ले लिया गया था।

इसके बाद साल 2013 में उच्च न्यायालय की एकल सदस्यीय पीठ ने पुलिस को आदेश दिया था कि न्यायाधीशों को हिरासत में लेने के मामले में परवेज मुशर्रफ के खिलाफ आतंकवाद विरोधी कानून के तहत मुकदमा दर्ज किया जाए। एटीसी ने उन्हें पहले ही न्यायाधीशों की हिरासत मामले में घोषित अपराधी घोषित कर दिया है क्योंकि वह मार्च 2016 से दुबई में रह रहे हैं। अभियोजन पक्ष ने इस मामले में आरोपियों के खिलाफ पूरे सबूत रखे हैं। हालांकि, मुकदमा की यथास्थिति बनी हुई है क्योंकि परवेज मुशर्रफ इस मामले में फरार चल रहे हैं।