लंदन। भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी की जेल में 11 नवंबर तक के लिए रिमांड बढ़ा दी गई है। इसी दिन दो अरब डॉलर के पीएनबी घोटाले में आरोपित नीरव मोदी की अगली रिमांड के लिए सुनवाई भी लंदन की जेल में वीडियो लिंक के जरिए होगी। भारत सरकार द्वारा लगाए गए आरोपों के आधार पर जारी प्रत्यर्पण वारंट पर स्कॉटलैंड यार्ड पुलिस ने मार्च में नीरव मोदी को गिरफ्तार किया था।

वेस्टमिंस्टर मेजिस्ट्रेट कोर्ट की जज नीना टेम्पिया ने नीरव मोदी के भारत प्रत्यर्पण मामले की सुनवाई अगले साल 11 मई से 15 मई के बीच होने की पुष्टि की। साथ ही यह याद दिलाया कि उसे हर 28 दिन पर वीडियो लिंक के जरिए सुनवाई के दौरान पेश होना होगा। इससे पहले सितंबर में उसकी रिमांड को बढ़ाकर 17 अक्टूबर किया गया था।

यह प्रक्रिया अगले साल फरवरी तक चलेगी, जब तक कि उसकी भारत प्रत्यर्पण के लिए सुनवाई की प्रक्रिया का प्रबंधन पूरा नहीं हो जाता है। अदालत को बताया गया था कि 48 वर्षीय नीरव मोदी ने सिर्फ अपने नाम, जन्मतिथि, धांधली और भारत में मनी लांड्रिंग के मामलों की पुष्टि के लिए ही अपनी जबान खोली थी। वह लंदन के दक्षिण-पश्चिम में स्थित वैंड्सवर्थ जेल में बंद है। यह इंग्लैंड की सबसे भीड़-भाड़ वाली जेल मानी जाती है। मोदी जेल में इस साल मार्च में गिरफ्तार होने के बाद से कैद है।

उसके खिलाफ स्कॉटलैंड यार्ड पुलिस ने प्रत्यर्पण का वारंट जारी किया था। भारत सरकार के लगाए आरोपों पर ही प्रत्यर्पण के लिए ब्रिटेन की अदालत में क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस उस पर मुकदमा चला रही है। नीरव मोदी की गिरफ्तारी के बाद से ही सॉलिसिटर आनंद दुबे और बैरिस्टर क्लेर माउंटगोमरी के नेतृत्व में उनकी लीगल टीम ने चार दफा जमानत याचिका दायर की है।

मगर, हर बार अदालत ने यह कह कर जमानत याचिका खारिज कर दी कि नीरव मोदी के फरार हो जाने का डर है। जज नीना टेम्पिया का फैसला लंदन स्थित रॉयल कोर्ट ऑफ जस्टिस को सौंपा गया। इसके बाद जून में जज इनग्रिड सिमलर ने ठोस आधार पर पाया कि नीरव मोदी को जमानत दी गई तो वह वापस सरेंडर नहीं करेगा, बल्कि वह फरार हो सकता है।

Posted By: Shashank Shekhar Bajpai