वॉशिंगटन। आपने आसामान में आतिशबाजी भी की होगी और उसे देखा भी होगा। मगर, आसमान में प्रकृति की आतिशाबाजी देखना एक जबरदस्त और अद्भुत अनुभव होता है। सोमवार और मंगलवार की रात की रात को कुदरत आपको यह मौका देने जा रही है, जब प्रति घंटे एक दर्जन उल्का पिंड और कुल मिलाकर 50 या उससे अधिक उल्का पिंडों की बारिश होगी। धरती के वायुमंडल में प्रवेश करते समय यह जलने लगते हैं और यह नजारा देखने लायक होता है।

उल्का पिंडों की बारिश तब होती है, जब अंतरिक्ष-जनित मलबे के एक फैलाव में धरती प्रवेश करती है। यह मलबा आमतौर पर एक बड़े धूमकेतु या क्षुद्रग्रह का टुकड़ा होता है, जो वहां से बहुत पहले से गुजरता था। रात करीब 10 बजे के पहले इस नजारे को देखा जा सकेगा। हालांकि, चंद्रमा की रोशनी की वजह से हो सकता है कि नजारा इतना खूबसूरत न दिखे। फिर भी आकाशीय आतिशबाजी साफ देखी जा सकेगी।

हम हर साल एक ही समय में उल्का बौछार को देखते हैं क्योंकि पृथ्वी इस समय मलबे के उसी क्षेत्र से होकर गुजरती है, जो सूर्य के चारों ओर अपनी वार्षिक कक्षा में स्थित होती है। जब मलबे का एक टुकड़ा लगभग 60 मील की दूरी पर धरती के बाहरी वातावरण में प्रवेश करता है, तो घर्षण के कारण यह जल जाता है। अधिकांश शूटिंग सितारे जिन्हें आप वास्तव में देखते हैं, कंकड़ चावल या छोटे अनाज के होते हैं।

नासा के मौसम संबंधी पर्यावरण कार्यालय का नेतृत्व करने वाले बिल कुक कहते हैं कि यदि आपको आसमान में एक आग का गोला दिखता है, तो यह शायद उससे बड़ा हो सकता है। ये टुकड़े एक सेंटीमीटर से बड़े हो सकते हैं। यद्यपि उनकी मौलिक रचना को निर्धारित करना कठिन है, लेकिन कुछ उल्काओं में मैग्नीशियम, लोहा, कार्बन और सिलिकॉन पाए जाते हैं।