वाशिंगटन। प्रोस्टेट कैंसर से जूझ रहे पुरुषों के लिए उम्मीद की नई किरण दिखी है। भारतवंशी समेत शोधकर्ताओं के एक दल का कहना है कि रेडिएशन की मात्रा बढ़ाकर प्रोस्टेट कैंसर के शुरुआती दौर से गुजर रहे मरीजों का इलाज बहुत कम समय में किया जा सकता है।

अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के असिस्टेंट प्रोफेसर अमर किशन ने कहा, 'ज्यादातर मरीजों पर पारंपरिक रेडिएशन की पद्धति अपनाई जाती है। उन्हें रोजाना रेडिएशन से गुजरना पड़ता है और इसमें करीब नौ हफ्ते का समय लगता है। नई टेक्नोलॉजी की मदद से यह इलाज अपेक्षाकृत बहुत कम समय में संभव है।'

वैज्ञानिकों ने बताया कि स्टीरियोस्टैटिक बॉडी रेडियोथेरेपी के जरिये चार से पांच दिन में ही इलाज किया जा सकता है। इसमें रेडिएशन की ज्यादा मात्रा का प्रयोग होता है।

अध्ययन में यह भी पाया गया कि रेडिएशन की ज्यादा मात्रा प्रयोग करने की इस पद्धति से मरीजों पर कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ता। साथ ही इलाज के असर में भी कोई कमी नहीं आई।