मॉस्को। भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो ने चंद्रयान-2 मिशन के लॉन्च की तारीख की घोषणा कर दी है। मगर, क्या आप जानते हैं कि इस मिशन का रूस से भी कनेक्शन है। इस मिशन के बारे में कहा जा रहा है कि यह पूरी तरह से स्वदेशी है और यह वैज्ञानिक की तुलना में तकनीकी मिशन अधिक है।

इसका प्राथमिक लक्ष्य सॉफ्ट लैंडिंग की क्षमता हासिल करना और रोवर के सेमी ऑटोनॉमस मूवमेंट का परीक्षण करना है। इस मिशन ने अंतरिक्ष एजेंसी और निजी उद्योग के बीच संबंधों को गहरा किया है और कई नई स्वदेशी प्रौद्योगिकियों के निर्माण को बढ़ावा दिया है। चंद्रयान -2 मिशन से इसरो चंद्रमा के अपने वैज्ञानिक अध्ययन को अगले स्तर तक ले जाएगा।

2007 में हुआ था रूस से समझौता

साल 2007 में इसरो ने चंद्रयान -2 मिशन की तकनीकी सहायता हासिल करने के लिए रूस के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इसके अनुसार, चंद्रयान-2 मिशन को इसरो और रूसी अंतरिक्ष एजेंसी रॉसकोमॉस (ROSCOSMOS) की संयुक्त परियोजना माना जाना था। समझौते के हिस्से के रूप में रूस को मिशन के लिए लैंडर और रोवर के भागों को मुहैया करना था, जबकि ऑर्बिटर के लिए भारत जिम्मेदार होगा। मिशन को मूल रूप से साल 2015 के लिए तैयार किया गया था।

साल 2011 में मंगल के दो चंद्रमाओं में से एक पर रूसी नमूना वापसी मिशन फोबोस-ग्रंट विफल हो गया था। फोबोस-ग्रंट अंतरिक्ष यान को यिंगहुओ-1 के साथ लॉन्च किया गया था, जो मंगल पर जाने वाला पहला चीनी अंतरिक्ष यान था। मगर, मिशन विफल हो गया और दो अंतरिक्ष यान प्रशांत महासागर में गिर गए थे। रूस ने इसके बाद मिशन की समीक्षा शुरू की और चंद्रयान-2 मिशन का भविष्य रूस की उसी समीक्षा पर निर्भर है।

रूस ने कहा था कि यदि साल 2015 में रोवर को भेजा गया, तो मिशन के विफल होने का खतरा अधिक है। इसके साथ ही भारत से रोवर के कंपोनेंट की आपूर्ति करने के लिए कहा था। हालांकि, इसरो पहले से ही स्वदेशी रोवर्स के लिए कुछ प्रारंभिक परीक्षण कर रहा था और चंद्रयान-1 मिशन में इम्पैक्टर के साथ अपनी क्षमताओं को साबित कर दिया था।

मामूली रूप से जुड़ा है रूस

परिणामस्वरूप इसरो ने पूरे चंद्रयान -2 मिशन की समीक्षा की। एकीकृत समीक्षा (इंटीग्रेटेड रिव्यू) में सिफारिश की गई थी कि भारत कुछ वर्षों में लैंडर और रोवर दोनों के कंपोनेंट्स को मुहैया कर सकता है। इसके बाद भारत में बने लैंडर और रोवर को समायोजित करने के लिए ऑर्बिटर को फिर बनाया गया और विशेष रूप से बनाए गए इस वैज्ञानिक पेलोड को अंतिम रूप दिया गया।

अगस्त 2013 में राज्यसभा में उठाए गए एक प्रश्न के उत्तर में कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन व प्रधानमंत्री कार्यालय के मंत्री वी. नारायणसामी ने कहा- चंद्रयान-2 रूसी टाई-अप के बिना भारत द्वारा एक अकेला मिशन होगा। रूस अभी भी मिशन के साथ मामूली तरीकों से जुड़ा हुआ है। एक रूसी कंपनी आइसोटोप ने चंद्रयान-2 मिशन के लिए लगाए जा रहे वैज्ञानिक उपकरणों में से एक के लिए Cm-244 अल्फा-एमिटर प्रदान किया है। निजी उद्योग के पार्टनर्स ने चंद्रयान-2 के लिए कुछ सेंसर और ऑप्टिक्स भी मुहैया कराए हैं।