एक नए अध्ययन में दावा किया गया है कि कोरोना संक्रमण मस्तिष्क में गंभीर इंफ्लेमेशन यानी सूजन का कारण बन सकता है। जर्मनी की फ्रीबर्ग यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के अध्ययन से जाहिर होता है कि कोरोना पीड़ितों के सेंट्रल नर्वस सिस्टम (केंद्रीय तंत्रिका तंत्र) में इंफ्लेमेशन की गंभीर समस्या खड़ी हो सकती है। कोरोना वायरस (कोविड-19) की चपेट में आने वाले लोगों में यह घातक वायरस दूसरी गंभीर समस्याओं का भी कारण बन रहा है। यूनिवर्सिटी के मेडिकल सेंटर की प्रमुख शोधकर्ता हेनरिक सैली ने कहा, 'हालांकि कोरोना में सेंट्रल नर्वस सिस्टम पर असर पड़ने को लेकर पहले साक्ष्य मिल चुके हैं, लेकिन मस्तिष्क तक इंफ्लेमेशन का विस्तार चकित करने वाला है।' शोधकर्ताओं के अनुसार, मस्तिष्क की आवश्यक सुरक्षा कोशिकाओं को माइक्रोग्लियल सेल्स कहते हैं और ये खासतौर पर मजबूती से सक्रिय रहती हैं। हमें ब्रेन स्टेम में टी-किलर सेल्स और न्यूरोइंफ्लेमेशन भी देखने को मिला। मस्तिष्क में इसके अलावा भी कई बदलाव दिखाई दिए। शोधकर्ताओं ने बताया कि मस्तिष्क में वायरल रिसेप्टर एसीई2 स्पष्ट तौर पर दिखाई दिया। इस रिसेप्टर से कोरोना वायरस जुड़ सकता है।

इसके जरिये यह वायरस सीधे मस्तिष्क में दाखिल हो सकता है। इम्युनिटी पत्रिका में अध्ययन के नतीजों को प्रकाशित किया गया है। अध्ययन से जुड़े शोधकर्ता नई विधि इमेजिंग मास साइटोमेट्री के इस्तेमाल से न सिर्फ विभिन्न प्रकार की सेल्स (कोशिकाओं) के निर्धारण में सक्षम हुए बल्कि उन वायरस संक्रमित कोशिकाओं की पहचान करने में भी कामयाब हुए, जिनका पहले विस्तार से विवरण नहीं मिल पाता था।

Posted By: Navodit Saktawat

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