दुनिया में कई देश ऐसे हैं जहां महिलाएं आज भी अपने हक की लड़ाई नहीं लड़ सकती। खुद के देश की अजीब कानून की वजह से सऊदी अरब की महिलाएं बदतर हालात में जीवन गुजार रही हैं। सऊदी की महिलाओं को बेसिक अधिकारों से भी वंचित रखा जाता है। कई बार सोशल मीडिया पर सऊदी के कानून और महिलाओं के साथ हो रहे गलत व्यवहार का जिक्र किया जाता है। सऊदी की महिलाओं की हालत का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि वहां शादी से पहले संबंध बनाने को गैरकानूनी माना जाता है। इतना ही नहीं इस तरह के मामलों में महिलाओं को कड़ी से कड़ी सजा भी दी जाती है।

जैसा की पहले भी जिक्र किया जा चुका है कि सऊदी में महिलाओं के घर से अकेले निकलने तक पर पाबंदी है। इससे ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि बिन ब्याही या कुंवारी मां के साथ यहां के लोग कैसा व्यवहार करते होंगे। सजा, दुर्व्यवहार और जेल जाने से बचने के लिए यहां कि बिन ब्याही मां सड़कों पर अपना बच्चा फेंक कर चली जाती हैं। पिछले कुछ सालों में सऊदी में इस तरह की घटनाएं बहुत बढ़ी हैं।

सजा से बचने के लिए महिलाएं सड़क पर छोड़ देती हैं अपना बच्चा

न्यूयॉर्क में रहने वाली एक सऊदी महिला दाना अलमायॉफ ने कहा, यहां मासूम बच्चों को सड़कों पर छोड़ दिया जाता है। यहां महिलाओं सड़कों पर भी सुरक्षित नहीं है। ज्यादातर सऊदी अरब के अखबार इस विषय पर चाहकर भी कुछ नहीं लिख सकते क्योंकि इसे प्रतिबंधित और कानून के खिलाफ माना जाता है। यहां कि ज्यादातर महिलाएं विवाह से पहले जन्मे बच्चे को सड़क पर डालकर चली जाती हैं। सऊदी के कड़े कानून और सजा से बचने के लिए यहां की महिलाएं ऐसा करती हैं।

रेप साबित करना महिलाओं के लिए होता है इतना मुश्किल

सऊदी अरब में रेप करने वालों के खिलाफ सख्‍त कानून है। लेकिन, एक सच्चाई ये भी है कि यहां रेप बड़ी संख्‍या में होते हैं। यहां का कानून कहता है कि, रेप की घटना में किसी भी आरोपी को तब तक सजा नहीं दी जा सकती, जब तक कि रेप के चार चश्मदीद ना हों। ऐसी स्थिति में कई बार महिलाओं के लिए रेप साबित करना बहुत मुश्किल हो जाता है। कुछ मामलों में तो ये भी देखा गया है कि रेप की घटना के वक्त यदि महिला बिना किसी पुरुष गार्जियन के घर से निकली थी तो उलटा महिला को ही सजा सुना दी जाती है। सऊदी के कानून के अनुसार, आपका परिवार कितना भी खुले विचारों वाला क्यों न हो, लेकिन आप शादीशुदा नहीं हैं तो आप बच्चे को नहीं अपना सकते। कई बार तो ऐसा भी देखा गया है कि रेप होने पर परिवार के लोग लड़की के साथ ही बुरी तरह मारपीट करते हैं। इतना ही नहीं यहां के कुछ रूढ़िवादी लोग तो लड़कियों जान से मारने में भी नहीं कतराते।

अपराध के लिए लड़की को ही मानते हैं दोषी

एमनेस्टी की नवीनतम मानवाधिकार रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी की महिलाएं सबसे ज्यादा हिंसा की शिकार होती हैं। इस हिंसा में सेक्शुअल हैरेसमेंट भी शामिल है। किसी भी तरह के अपराध के लिए सऊदी के लोग लड़की को दोषी ठहराते हैं। अगर लड़की के पिता या भाई ने उसके साथ दुष्कर्म किया है, तो भी लड़की को ही जिम्मेदार माना जाता है। अगर आपके साथ दुष्कर्म किया जाता है, तो यहां के लोग दुष्कर्म पर बात ना करके उस कारण की तलाश करते हैं जिसके चलते आपके साथ दुष्कर्म हुआ है। अल्मायॉफ एक फोटोग्राफर हैं और उसने साल 2012 में सऊदी छोड़ दिया था। उन्होंने बताया कि कभी-कभी लोग मस्जिदों, अनाथालयों या अस्पतालों के बाहर शिशुओं को छोड़कर चले जाते हैं। लोग ऐसा इसलिए करते हैं क्योंकि यहां का कानून बच्चे के बारे में पूछताछ करेगा और संभव है कि आपको सजा ही सुना दे।

Posted By: Sushma Barange