रियाद। सऊदी अरब ने महिलाओं के यात्रा करने पर लगे प्रतिबंधों में ढील दी है। मगर, पर्यवेक्षकों का कहना है कि कानून में मौजूद कमियों की वजह से अभी भी उनके पुरुष रिश्तेदार उनकी यात्रा करने को काफी हद तक रोक सकते हैं और सबसे खराब स्थिति में उन्हें जेल जैसे हालात में छोड़ देते हैं। बताते चलें कि अगस्त में रूढ़िवादी राज्य ने 21 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं को अपने "संरक्षक" (पिता, पति या अन्य पुरुष रिश्तेदारों) की स्वीकृति के बिना पासपोर्ट प्राप्त करने की अनुमति दी थी।

यह कदम वास्तव में शासक क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की राष्ट्रीय छवि को सुधारने की योजना का हिस्सा था। इसकी वजह से कुछ चरम मामलों में महिलाएं देश छोड़कर भागने तक का कदम उठा लेती थीं। हालांकि, जानकारों ने चेतावनी दी है कि क्राउन प्रिंस के सुधारों को दरकिनार करना सऊदी के लोगों के लिए आसान है। यूरोपियन काउंसिल फॉर फॉरेन रिलेशंस के फेलो इमान अलहुसैन ने कहा कि महिलाओं के अभिभावक अभी भी पुलिस में शिकायत दर्ज करा सकते हैं कि उनके घर की महिला 'लापता' है। ऐसा होने पर महिलाओं की गिरफ्तारी हो सकती है और उन्हें डार अल-रिएया (महिला आश्रय) में संभावित हिरासत में रखा जा सकता है।

राज्य में संचालित होने वाले महिला आश्रयों (वुमन शेल्टर होम) की प्रणाली अपारदर्शी है, लेकिन वहां की स्थितियों का लेखा-जोखा एक भयावह तस्वीर पेश करता है। ह्यूमन राइट्स वॉच सहित महिला अधिकारों के लिए काम करने वाले कार्यकर्ताओं का कहना है कि महिलाओं को वहां हिरासत की तरह रखा जाता है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि शेल्टर होम में कितनी महिलाओं को रखा जाता है।

एक पश्चिमी अधिकारी ने बताया कि सऊदी में एक पिता अपनी बेटियों को पासपोर्ट हासिल करने से नहीं रोक सकते हैं। मगर, वे अभी भी स्थानीय पुलिस में उनके लापता होने की घोषणा कर सकते हैं, जो माता-पिता के लिए उनकी बेटियों को खोज कर उन तक पहुंचा देते हैं। यह क्राउन प्रिंस के सुधार में बड़ा छेद है। हालांकि, सुधारों की घोषणा किए जाने के बाद पासपोर्ट के लिए आवेदन करने वाली महिलाओं की संख्या में काफी इजाफा देखा गया है।

Posted By: Shashank Shekhar Bajpai