न्यूयार्क। शाहजहां के बेशकीमती खंजर से लेकर निजाम की मूल्यवान तलवार तक की नीलामी न्यूयार्क में की गई। नीलामी नीलाम घर क्रिस्टी ने की है, जिसमें महाराजाओं और मुगलों के खजाने के बेशकीमती साजो-सामान शामिल है। नीलामी के सामानों में मुगल बादशाह शाहजहां का बेशकीमती जेड पत्थर (हरिताश्म) के मूठ वाला खंजर, हैदराबाद के निजामों की अलंकृत तलवार और मुगलकालीन रत्नजड़ित हुक्के ने विश्व रिकार्ड बनाया है। कुल मिलाकर 10.9 करोड़ डॉलर यानी करीब 750 करोड़ रुपये की आय नीलामी से हुई है।

नीलामी घर क्रिस्टी के जारी बयान के मुताबिक 'महाराजा एंड मुगल मैग्नीफिसेंस' नाम से आयोजित इस नीलामी में पहली बार भारतीय कला और मुगलों से जुड़े इतने अधिक सामान की नीलामी की गई। साथ ही यह दूसरी ऐसी नीलामी थी जिसमें जेवरों का निजी बेहतरीन कलेक्शन प्रदर्शित किया गया था। इस नीलामी में बेचे गए सामान कटारी शाही परिवार के अल थानी कलेक्शन का हिस्सा हैं।

शाहजहां के खंजर की बिक्री 3,375,000 डॉलर यानी करीब 23.4 करोड़ रुपये में हुई। शाहजहां के किसी भी जेड से बने सामान की यह अब तक मिली सबसे बड़ी कीमत है। वहीं निजाम की तलवार 1,935,000 डॉलर यानी करीब 13.4 करोड़ रुपये में नीलाम हुई। यह अब तक की किसी भी भारतीय तलवार की सबसे ऊंची कीमत है। रत्नजड़ित हुक्का सेट 759,000 डॉलर करीब 5.27 करोड़ रुपये में बिका है।

बारह घंटे तक चली इस नीलामी में सबसे ऊंची बोली वाली यह बेशकीमती वस्तुएं हैं। पारसी ज्वैलर कार्टियर का वर्ष 1912 का बेले इपोक्यू डेवंट-डी-कोर्स ब्रोच 10,603,500 डॉलर यानी करीब 73.7 करोड़ रुपये में बिका है। इस बेशकीमती खजाने में 29बहुमूल्य सामान भारत के थे। इनकी कुल कीमत दस लाख डॉलर से अधिक थी। दो भारतीय हीरों की भी अच्छी कीमत मिली है। गोलकुंडा की खदान से निकले द मिरर ऑफ पैरेडाइज डायमंड (52.58 कैरेट) की कीमत 6,517,500 डॉलर (करीब 45 करोड़ रुपये) लगी है। यह मानवजाति की जानकारी वाली पहली खदानों में से एक से है। दूसरा हीरा भी गोलकुंडा से ही है। अरकोट-2 नामक 17 कैरेट का हीरा कभी अरकोट के नवाब की संपत्ति था। इसकी बिक्री 3,375,00 डॉलर (करीब 23.5 करोड़ रुपये) में हुई। इस हीरे की मालकिन कभी ब्रिटिश महारानी चारलोट भी थीं।

इसी तरह हैदराबाद के निजाम के एंटीक 33 हीरों वाले डायमंड नेकलेस को करीब 17 करोड़ रुपये में बेचा गया है। क्रिस्टी के अंतरराष्ट्रीय ज्वैलरी हेड राहुल कड़ाकिया ने बताया कि इस नीलामी में जयपुर के राजघराने, इंदौर और बड़ौदा के राजघराने भी शामिल हुए। बड़ौदा की महारानी सीता देवी का खूबसूरत ब्रेसलेट करीब 11.4 करोड़ रुपये में बिका है। इस ब्रेसलेट में पन्ने के मोतियों, हीरों और प्लेटिनम जड़े हुए है। नीलामी की शुरुआत इंदौर के पुखराज तावीज मोती पेंडेंट नेकलेस से हुई। इसे इंग्लैंड में पढ़े इंदौर के महाराजा यशवंत राव होल्कर-द्वितीय ने अपनी पत्नी को भेंट किया था। इस हार की बिक्री 1.44 करोड़ रुपये में हुई है। जयपुर की राजमाता गायत्री देवी की एक एंटीक हीरे की अंगूठी 4.45 करोड़ रुपये में बिकी। इसके अलावा बड़ौदा का रत्नजड़ित कपड़ा भी बिका जिसमें 9.5 लाख रत्नों से कशीदेकारी की गई है। 17वीं शताब्दी के मैसूर के शासक टीपू सुल्तान का मैजिक बाक्स, सोने से मढ़ा सिंहासन और पटियाला का माणिक्यों, मोतियों और हीरों से जड़ा चोकर भी बेचा गया। इसे वर्ष 1931 में पंजाब के महाराजा भूपेंद्र सिंह ने बनवाया था।

'क्रिकेट मैच' के पेंटिंग को मिले दस करोड़ से अधिक रुपये

ब्रिटिश कलाकार एलएस लॉवरी की एक पेंटिंग लंदन में सोदेबी की नीलामी में दस करोड़ रुपये से अधिक में बिकी है। इस पेंटिंग की खासियत है कि यह इंग्लैंड के सैलफोर्ड क्षेत्र में सड़क पर क्रिकेट मैच की बानगी को दिखाता है। इंग्लैंड में जारी वर्ल्ड कप के चलते 1938 में बनी इस पेंटिंग के भाव बढ़-चढ़कर लगे। 'क्रिकेट मैच' शीर्षक वाली यह पेंटिंग बच्चों में इस खेल को लेकर असीम लगाव को दर्शाती है।