Sri Lanka Crisis: श्रीलंका में गंभीर आर्थिक संकट के बीच यूनाइटेड नेशनल पार्टी (UNP) के नेता रानिल विक्रमसिंघे ने श्रीलंका के नए प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ ली। श्रीलंका में इस समय सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान हिंसा और आगजनी की घटनाओं ने अराजकता की स्थिति पैदा कर दी है। वैसे, श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे ने रानिल विक्रमसिंघे को प्रधानमंत्री नियुक्त किया है, लेकिन इससे जनता का गुस्सा शांत होने की उम्मीद नहीं दिख रही है। वजह ये है कि रानिल विक्रमसिंघे को राष्ट्रपति और पूर्व प्रधानमंत्री का करीबी माना जाता है। दूसरी बात ये कि पिछले चुनाव में इनकी पार्टी को 1 फीसदी से भी कम वोट मिले थे और अपनी पार्टी के एकमात्र निर्वाचित होनेवाले सांसद रानिल ही थे। ऐसे में उनकी लोकप्रियता और जनता के बीच भरोसे का अंदाजा लगाया जा सकता है।

सत्ताधारी राजपक्षे परिवार के लोगों को देश छोड़कर भागने से रोकने के लिए नेताओं के आवासों का घेराव किया जा रहा है। उधर, श्रीलंका की एक कोर्ट ने पूर्व प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे उनके राजनेता बेटे और 15 सहयोगियों के देश छोड़ने पर रोक लगा दी है।

रानिल विक्रमसिंघे बने नए पीएम

राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे आज देश में शांति कायम करने के लिए नए प्रधानमंत्री की नियुक्ति कर दी है। इसके पहले राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे ने ऐलान किया था कि वह एक हफ्ते में नए प्रधानमंत्री के नाम का ऐलान करेंगे। उन्होंने ये भी कहा था कि मैं मंत्रियों की नई कैबिनेट भी नियुक्त करूंगा, जिसमें राजपक्षे परिवार का कोई सदस्य नहीं होगा। लेकिन जनता पूरे राजपक्षे परिवार से नाराज है और उन्हें सत्ता से दूर देखना चाहती है। ऐसे में राष्ट्रपति की मौजूदगी में केवल प्रधानमंत्री बदलने से जनता मान जाएगी, ऐसा नहीं लगता।

कौन हैं रानिल विक्रमसिंघे?

रानिल विक्रमसिंघे पहले भी प्रधानमंत्री का पद संभाल चुके हैं। रानिल 1994 से यूनाइटेड नेशनल पार्टी के प्रमुख रहे हैं और अब तक 4 बार श्रीलंका के PM रह चुके हैं। 2019 में रानिल ने अपनी ही पार्टी के दबाव के चलते PM पद से इस्तीफा दे दिया था। 73 साल के रानिल ने 70 के दशक में रानिल ने राजनीति में कदम रखा और पहली बार 1977 में सांसद चुने गए थे। 1993 में पहली बार PM बनने से पहले रानिल उप विदेश मंत्री, युवा और रोजगार मंत्री सहित कई और मंत्रालय संभाल चुके हैं। वे संसद में दो बार विपक्ष के नेता भी रह चुके हैं। इस तरह आर्थिक और राजनीतिक संकट से गुजर रहे श्रीलंका में एक यूनिटी सरकार बनने का रास्ता साफ हो गया है।

Posted By: Shailendra Kumar