कोलंबो। श्रीलंका में इसी साल ईस्टर के मौके पर हुए धमाकों को लेकर प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे से सवाल-जवाब हो रहे हैं। विक्रमसिंघे के खिलाफ संसद में अविश्वास प्रस्ताव भी लाया गया। हालांकि सरकार बची रही, लेकिन अब वे संसद की स्थायी समिति के सामने पेश कर पूरी जानकारी देंगे। बता दें, 21 अप्रैल को श्रीलंका में नौ जगहों पर बम धमाके हुए थे। इन हमलों के जरिये तीन चर्च और तीन मशहूर होटलों को निशाना बनाया गया था। इस्लामिक स्टेट ने इन आतंकी हमलों की जिम्मेदारी ली थी, लेकिन सरकार ने एक स्थानीय कट्टरपंथी समूह को दोषी ठहराया है।

खुद विक्रमसिंघे ने कहा है कि वह ईस्टर के मौके पर देश में हुए बड़े आतंकी हमले के सिलसिले में संसद की स्थायी समिति के सामने पेश होंगे। इन हमलों में 258 लोगों की जान चली गई थी। विक्रमसिंघे का यह बयान गुरुवार को अविश्वास प्रस्ताव पर सरकार की जीत के बाद आया है। अविश्वास प्रस्ताव के जरिये सरकार पर यह आरोप लगाया गया था कि वह भारत के जरिये मिलीं अहम खुफिया सूचनाओं के बावजूद आतंकी हमलों को रोकने में विफल रही।

प्रस्ताव मार्क्सवादी पार्टी जनता विमुक्ति पेरामुना की ओर से पेश किया गया था, लेकिन दो दिनों तक चली बहस के बाद यह सदन में 92 के मुकाबले 119 मतों से गिर गया। विक्रमसिंघे ने इस विचार को खारिज किया है कि आतंकी घटना के बाद से देश में गतिविधियां ठप हो गई हैं। पीएम के मुताबिक आवास, अर्थव्यवस्था और रोजगार संबंधी तमाम परियोजनाओं पर तेज गति से काम चल रहा है। पर्यटन उद्योग में नई जान फूंकने के लिए भी तमाम कदम उठाए गए हैं। बम धमाकों के बाद से पर्यटन उद्योग पर सबसे अधिक असर पड़ा है।