कोलंबो। पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे के भाई गोतबाया राजपक्षे श्रीलंका के नए राष्ट्रपति निर्वाचित हो गए हैं। राजपक्षे ने यूनाइटेड नेशनल पार्टी (यूएनपी) के उम्मीदवार सजित प्रेमदासा को 13 लाख से अधिक वोटों से हराया। 10 वर्षों तक श्रीलंका के रक्षा सचिव रहे गोतबाया ने सिंहली बहुल देश के दक्षिणी इलाकों में एकतरफा जीत दर्ज की। लेकिन अल्पसंख्यक तमिल और मुस्लिम बहुल इलाकों में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। चीन समर्थक माने जाने वाले गोतबाया के बड़े भाई महिंदा राजपक्षे के कार्यकाल में श्रीलंका सरकार ने चीन को खूब बढ़ावा दिया। उनकी सरकार ने चीन को हंबनटोटा बंदरगाह और एयरपोर्ट का ठेका दिया।

माना जाता है कि भारत को हिंद महासागर में चारों तरफ से घेरने की चीन की योजना में श्रीलंका की उक्त परियोजनाएं अहम हिस्सा हैं। गोतबाया की इस जीत के साथ ही राजपक्षे परिवार की पांच साल बाद सत्ता में वापसी हो रही है। इससे पहले महिंदा राजपक्षे साल 2005 से 2015 तक देश के राष्ट्रपति रहे थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजपक्षे को राष्ट्रपति चुनाव जीतने पर बधाई दी है। जवाब में राजपक्षे ने कहा कि वह निकट भविष्य में मोदी से मिलने को उत्सुक हैं।

उधर, चुनाव में हार के साथ ही प्रेमदासा ने तत्काल प्रभाव से यूएनपी के उपनेता पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने ट्वीट किया- लोगों के निर्णय का सम्मान करना और श्रीलंका के सातवें राष्ट्रपति के तौर पर चुने जाने के लिए गोतबाया को बधाई देना मेरे लिए सौभाग्य की बात है। मैं उन नागरिकों का आभारी हूं, जिन्होंने मुझे वोट दिया। इन नतीजों के बाद के बाद यूएनपी के नेता और प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे पद छोड़ सकते हैं। माना जा रहा है कि गोतबाया राजपक्षे अपने बड़े भाई महिंदा राजपक्षे को प्रधानमंत्री बनाएंगे।

राष्ट्रपति चुनाव में कुल 35 उम्मीदवार मैदान में थे। राजपक्षे को जहां 52.25 फीसद (6,924,255) वोट मिले, वहीं प्रेमदासा 41.99 फीसद (5,564,239) मत प्राप्त करने में सफल रहे। शनिवार को हुए मतदान में 1.59 करोड़ मतदाताओं में से 80 फीसदी से कुछ अधिक ने भाग लिया था।

यूएनपी के सजित प्रेमदासा को 13 लाख से अधिक वोटों से राजपक्षे ने हराया। जानिए भारत को क्यों करनी चाहिए चिंता।

Posted By: Shashank Shekhar Bajpai

fantasy cricket
fantasy cricket