Swastik Village In America: हिंदू धर्म में स्वस्तिक का विशेष महत्व है। हर शुभ अवसर पर स्वस्तिक बनाया जाता है और उसकी पूजा होती है। इससे जुड़ी ताजा खबर अमेरिका से आ रही है। दरअसल, यहां स्वस्तिक नामका एक गांव है। यूं यह गांव 100 साल पुराना है, लेकिन अब लोगों ने इसे नाजियों का प्रतीक चिह्न बताते हुए विरोध करना शुरू कर दिया। आवाड उठी कि गांव का नाम बदल दिया जाए। सभी राय लेने के लिए वोटिंग करवाई गई और आखिरी में फैसला हुआ कि गांव का नाम स्वस्तिक ही रहेगा। पढ़िए अमेरिका में गांव का नाम नहीं बदले जाने की पूरी कहानी

स्थानीय मीडिया के अनुसार, अमेरिका में न्यूयॉर्क के एक छोटे-से गांव का नाम स्वस्तिक रहे या नहीं, यह तय करने के लिए वोटिंग करानी पड़ी। इस नाम के खिलाफ एक भी वोट नहीं पड़ा और गांव का नाम Swastik ही रहा। दरअसल, इस नाम को नाजियों के प्रतीक चिह्न से जोड़कर आपत्ति जताई गई थी। किस्सा यह है कि न्यूयॉर्क का एक पर्यटक माइकल अलकेमो इधर से गुजरा तो उसकी नजर गांव के नाम पर पड़ी। अलकेमो ने ही इस नाम को लेकर शिकायत दर्ज कराई थी।

शहर के ब्लैक ब्रुक टाउन काउंसिल ने 14 सितंबर को सर्वसम्मति से Swastik नाम नहीं बदलने के लिए वोट दिया। ब्लैक ब्रुक के पर्यवेक्षक जॉन डगलस ने कहा, 1800 के आसपास इस गांव के मूल निवासियों ने इसका नाम Swastik रखा था। यह नाम संस्कृत के शब्द Swastik से लिया गया था, जिसका अर्थ होता है-कल्याण। इस नाम को हमारे पूर्वजों ने चुना था। हिटलर और उसकी नाजी पार्टी ने भी स्वस्तिक को प्रतीक चिह्न के रूप में अपनाया था। हिंदू, बौद्ध,जैन आदि धर्मों में स्वस्तिक को पवित्र माना जाता है। इसलिए घरों और मंदिरों की दीवारों पर लगाया जाता है।

Posted By: Arvind Dubey

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

ipl 2020
ipl 2020