नवोदित सक्‍तावत, इंदौर।

हैप्पी बर्थ डे बीटल्स। यदि बैंड के फार्मेशन को शाब्दिक बर्थ डेट ना मानें तो 11 फरवरी 1961 को ही बीटल्स का बर्ड डेट मान लिया जाए। इसी दिन बीटल्स ने अपने पहले एलबम प्लीज प्लीज मी की रिकॉर्डिंग शुरू की थी। एलबम के कुल 14 में से 11 गीत इन्होंने एक ही दिन में रिकॉर्ड कर डाले थे, जो स्वयं एक रिकॉर्ड है।

11 फरवरी का दिन लंदन के ईएमआई रिकार्डिंग स्टूडियो के लिए वाकई खास और यादगार रहा। दिन शुरू होते ही जब युवक जॉन लेनन, पॉल मकार्टनी, जार्ज हैरिसन और रिंगो स्टार स्टूडियो पहुंचे, तब वहां के स्टाफ को पता नहीं था कि वे संगीत इतिहास के सफलतम, मधुरतम और श्रेष्ठतम समूह के लिए माध्यम बनने जा रहे हैं।

पहले दौर में चारों ने कुछ गीत रिकॉर्ड कराए। जब दोपहर दो बजे स्टूडियो का स्टाफ लंच पर गया, तब भी चारों डटे रहे। लंच नहीं लिया। केवल दूध लिया। शायद वे लय को भंग नहीं करना चाहते थे, यह बात अलग है कि पहले एलबम के गीतों में ना कोई खास दर्शन था, ना संदेश। हां, माधुर्य अवश्य था।

एक साक्षात्कार में किसी बीटल ने कहा भी था—हमारे दिमाग में पर्टिक्युलर खाका नहीं था कि ऐसा ही करना है, वैसा ही करना है, हम केवल संगीत की धारा और रॉक एन रोल म्यूजिक के साथ बहना चाह रहे थे। जो मन को लगा, करते गए, आखिर में देखा तो एलबम रिकॉर्ड हो गया।

चार नौजवानों का संगीत के प्रति जुनून और लगन देख स्टूडियो का स्टाफ भी दंग रह गया। ऐसे लोगों से उनका पहले वास्ता नहीं पड़ा था। चारों लगातार तकरीबन 13 घंटे तक जमे। इस बीच रिहर्सल, रिकॉर्डिंग, करेक्शन, टेक—रिटेक के दौर चलते रहे।

आखिर रात 10 बजे स्टूडियो स्टाफ ने घड़ी देखी और क्लोजिंग का समय हुआ तब भी चारों एक और गीत को रिकॉर्ड करने के लिए चर्चारत थे।फरवरी की सर्द रात थी और मारे सर्दी के लेनन का गला बैठ गया था। वे दिन भर गा—बजा भी रहे थे। आखिर थोड़े वक्त की रियायत मिली और इस बीच मकार्टनी और लेनन में चर्चा हुई कि अगले गीत को कैसे जमाया जा सकता है। आखिर तय हुआ।

अगला गीत रिकॉर्ड किया गया। यह गीत था ट्विस्ट एंड शाउट। यह विशुदृध रॉक एन रोल स्टाइल का गीत था. इस एलबम को सुनने पर नोटिस किया जा सकता है कि सारे गीत लगभग एक जैसे ही मालूम पडते हैं। एक जैसा संगीत, एक जैसा रंग, मूड व मिजाज। नए नवैले मकार्टनी और हैरिसन की आवाज में बहुत साम्य था। रिंगो को हर एलबम में अदद सिंगल देने की परिपाटी शायद यहीं से शुरू हुई थी।

इसमें भी रिंगो का एक सिंगल था। लेनन के हिस्से तीन—चार गीत आए। खैर, बाद के दिनों में साउंड मिक्सिंग, बैकिंग वोकल, डबल टैक इत्यादि फिनिशिंग होती रही। चंद दिनों में एलबम बाजार में आ गया। हालांकि यह काम आसानी से भी हो सकता था लेकिन दिनभर डटे रहकर एक ही दिन में 11 गीत रिकॉर्ड कराने की खुराफात, करामात इन्होंने क्या सोचकर की, पता नहीं।

एक सामान्य रॉक एन रोल एलबम से शुरूआत करके तीन साल बाद 1964 में न्यूयार्क के अपने महत्वाकांक्षी दौरे तक आते—आते ये चार नौजवान युवाओं के आदर्श बन चुके थे। क्लासिकल संगीत के पर्याय और प्रयोगवादिता के वैश्विक झंडाबरदार। वे बीटल्स बन चुके थे, जिनकी अभूतपूर्व लोकप्रियता ने बीटल्स मैनिया नाम का शब्द गढ़ा।

बीटल्स के चहेते वेबसाइटों पर लिखते हैं कि ये लोग वो थे जो हर चीज पर संगीत बनाने की अदभुत क्षमता रखते थे, ना केवल संगीत बनाना बल्कि उसे सुमधुर का जामा भी पहनाना। यह बात सौ टका सच भी है। बीटल्स को कभी अन्य लोगों की तरह इंस्पिरेशन या सबजैक्ट का टोटा नहीं पडा। वे विषय की तलाश में कभी भटके भी नहीं। जहां बैठे वहीं से मौजू मिला। भौतिकता और अध्यात्म को इन्होंने अपने कलेवर में खूब गूंथा और मौलिकता की छौंक लगाकर जब परोसा तो वो स्वाद मिला कि बीटल्स के दीवाने आज भी अघा रहे हैं।

दैनिक जीवन की सामान्य से सामान्य बातों पर संगीत रच देने का उनमें गजब का माद्दा था। गौर फरमाइये— ब्रेकफास्ट, गुड मार्निंग, गुड नाइट, रेन, पोस्टमैन, मैचबॉक्स, बुलडॉग, प्रणय, रोड एक्सीडेंट, जुर्माना, दर्शन, अध्यात्म, अस्त—व्यस्त, शहद, नातेदार, व्यक्तिगत जीवन के संबंधी, बर्थडे, टैक्स, नींद, पनडुब्बी, समलैंगिकता, सुनहरा दिन, डाक्टर ऐसे दर्जनों विषय हैं, जिन पर संगीत बनाने की कल्पना भी नहीं की जा सकती लेकिन फैब फोर ने रचा और बेमिसाल रचा। द फैब्युलस फोर, हू बिकेम माइल स्टोन इन म्यूजिक।

सच, बीटल्स एक घटना ही नहीं, एक तिलिस्म हैं जिसे तोड़ना दुरूह है। वक्त बढ़ने के साथ ही इनका संगीत पुरानी शराब की तरह और नशीला, और गहरा होता जा रहा है। जितना सुनो उतना कम। रोलिंग स्टोन ने लिखा था कि रॉक एंड रोल म्यूजिक विल नेवर बी सेम अगेन।

मैं कहता हूं म्यूजिक कैन एग्जीस्ट बट बीटल्स विल नेवर बी देयर अगेन! बहरहाल, पॉल मकार्टनी और रिंगो स्टार आज भी जीवित हैं और आधी सदी पीछे झांकते होंगे तो उन्हें पहले एलबम का शीर्षक याद आता होगा। तब वे कह रहे थे—प्लीज, प्लीज मी, आज कृतज्ञ संसार कहता है, यू प्लीज्ड अस!

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