ब्रिटेन। एक नए शोध के मुताबिक थूक से पता चल जाएगा कि कोई व्‍यक्‍ित कितने समय तक जिंदा रहेगा। दरअसल, जो व्‍यक्‍ित मृत्‍यु के जितना करीब होता है, उसके शरीर में एक खास एंटीबॉडी की संख्‍या काफी कम हो जाती है।

ऐसे में शोधकर्ताओं का कहना है कि लार की जांच करके मनुष्‍य के कुल स्‍वास्‍थ्‍य के बारे में जानकारी हासिल की जा सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि खून की जांच की तुलना में यह विधि से व्‍यक्‍ित को जांच में दर्द नहीं होता है।

अपने निष्‍कर्ष में शोधकर्ताओं ने बताया कि उन्‍होंने 639 वयस्‍क लोगों के सैंपल 1995 में लिए थे और इसके बाद अगले 19 वर्षों तक उनके स्‍वास्‍थ्‍य पर नजर रखी गई। उन्‍होंने पाया कि secretory immunoglobin A (IgA) एंटीबॉडी का स्‍तर मृत्‍यु के करीब पहुंचे लोगों में गिर जाता है।

शरीर में मौजूद एंटीबॉडी संक्रमण से लड़ने का काम करती है और यह सफेद रक्त कोशिकाओं से स्‍त्रावित होते हैं। यह शोध PLOS One जर्नल में प्रकाशित हुआ है। बरमिंघम यूनिवर्सिटी की डॉक्‍टर एना फिलिप्‍स ने बताया कि हम कितने अच्‍छे एंटीबॉडीज को प्रोड्यूस करते हैं और उन्‍हें बनाए रखते हैं, यह कई फैक्‍टर्स पर निर्भर करता है।

इनमें से कुछ कारकों जैसे उम्र, बीमारी आदि पर हमारा कोई नियंत्रण नहीं होता है। मगर, सामान्‍य परिस्थिति में तनाव, भोजन, एक्‍सरसाइज, शराब और एल्‍कोहल जैसी चीजों से एंटीबॉडीज के निर्माण पर असर पड़ता है।

Posted By: Shashank Shekhar Bajpai

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