वॉशिंगटन। नए डेटा से घबराए ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों ने ई-सिगरेट पर प्रतिबंध लगाने की योजना बनाई है। देशभर में फेफड़ों की बीमारी के 450 से ज्यादा मामले सामने आने और छह लोगों की मौत के बाद ट्रंप प्रशासन इस मुद्दे पर गंभीर है। दरअसल, युवा लोगों के ई-सिगरेट पीने की संख्या बढ़ती जा रही है। ट्रंप प्रशासन के इस फैसले से तेजी से बढ़ रहे इस बाजार को झटका लग सकता है।

बुधवार को एक ओवल कार्यालय की बैठक में मेलेनिया ट्रंप, स्वास्थ्य और मानव सेवा सचिव एलेक्स अजार और कार्यवाहक खाद्य एवं औषधि प्रशासन आयुक्त नेड शारप्लेस शामिल थे। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि हम लोगों को बीमार होने की इजाजत नहीं दे सकते हैं। हम अपने युवाओं को इतना प्रभावित नहीं होने दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि फर्स्ट लेडी मेलेनिया ट्रंप ने मंगलवार को वैपिंग को लेकर चेतावनी देने वाला ट्वीट किया था। वह अपने 13 वर्षीय बेटे बैरोन के कारण इस मुद्दे के बारे में बहुत दृढ़ता से महसूस करती है।

ट्रंप प्रशासन का यह कदम ऐसे समय में आया है, जब देशभर में स्वास्थ्य अधिकारी वैपिंग के कारण हुई फेफड़ों की बीमारी से जुड़े मामलों की जांच कर रहे हैं। वैपिंग की वजह से फेफड़ों की बीमारी के 450 से अधिक मामले सामने आए हैं, जिसमें छह से ज्यादा मौतों भी हुई है। कई रोगियों ने कैनेबी से संबंधित उत्पादों का उपयोग करने की सूचना दी है, लेकिन अधिकारियों ने किसी विशिष्ट प्रकार के वैपिंग से इनकार नहीं किया है।

आलोचकों ने पारंपरिक ई-सिगरेट के कठिन विनियमन के लिए दबाव बनाने के लिए इस मामले को उठाया है। दरअसल, मीठे और फल के स्वादों में आने वाली ई-सिगरेट को कई युवा लोग पसंद करते हैं। अजार ने बुधवार को कहा कि प्रशासन बिगड़ती हुई युवा महामारी को रोकने के लिए फ्लेवर्ड ई-सिगरेट को बाजार से खाली कराना चाहती है। उन्होंने कहा कि 2019 के नेशनल यूथ टोबैको सर्वे के शुरुआती आंकड़ों से पता चलता है कि युवाओं के ई-सिगरेट पीने की संख्या लगातार बढ़ रही है। हाई स्कूल के एक चौथाई से अधिक छात्रों ने पिछले 30 दिनों में ई-सिगरेट पी थी, जो साल 2018 की तुलना में 20 फीसदी से थोड़ा अधिक है। कई छात्रों ने कहा कि वे फल, मेन्थॉल या मिंट फ्लेवर का उपयोग करते हैं।