तुर्कमेनिस्तान के राष्ट्रपति गुरबांगुली बेर्दयमुखमेदोव (Gurbanguly Berdymukhamedov) ने पिछले दिनों अपने पसंदीदा कुत्ते की सोने की विशाल मूर्ति का अनावरण किया। तुर्कमेनिस्तान की राजधानी अश्गाबात में अलाबाई (Alabai) प्रजाति के इस कुत्ते की मूर्ति को स्थापित किया गया है। 20 फीट ऊंची यह मूर्ति कांसे की है और इस पर 24 कैरेट सोने की परत चढ़ाई गई है। इस मूर्ति को 30 फीट ऊंचे पोडियम पर स्थापित किया गया है।

तुर्कमेनिस्तान की आर्थिक हालत ठीक नहीं है और लोग गरीबी में जीवन बिता रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ राष्ट्रपति गुरबांगुली बेर्दयमुखमेदोव सोने की मूर्तियों का मोह नहीं छोड़ पा रहे हैं। इससे पहले उन्होंने साल 2015 में खुद की सोने की मूर्ति बनवाई थी। वे साल 2007 से सत्ता में काबिज हैं।

राष्ट्रपति गुरबांगुली बेर्दयमुखमेदोव ने साल 2017 में रूस के राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन को अलाबाई प्रजाति का एक पिल्ला गिफ्ट में दिया था। राष्ट्रपति गुरबांगुली बेर्दयमुखमेदोव ने अलबी प्रजाति के बारे में एक कविता लिखकर इसके राष्ट्रीय महत्व को उजागर किया था। वे इस कुत्ते को उपलब्धि और विजय का प्रतीक मानते हैं। इस मूर्ति को ऐसे इलाके में स्थापित किया गया है, जहां सरकारी अधिकारियों के रहने की व्यवस्था की गई है। इस नस्ल के कुत्ते तुर्कमेनिस्तान में भी होते हैं, इसलिए इन्हें राष्ट्रीय पहचान के रूप में देखा जाता है। तुर्कमेनिस्तान से हजारों-लाखों लोग देश से पलायन कर चुक हैं और यह सिलसिला अभी भी जारी है। लोगों का मानना है कि देश के हालात को सुधारने की बजाए पैसा ऐसी मूर्तियों पर खर्च किया जा रहा है। देश की जनता गरीबी में जीवन गुजारने को मजबूर है। प्रेस की स्वतंत्रता की बात करें तो हालात उत्तर कोरिया से भी खराब है। देश की अर्थव्यवस्था तेल और प्राकृतिक गैस की वजह से तेजी से बढ़ रही है लेकिन इसका फायदा सिर्फ अमीरों को हो रहा है।

Posted By: Kiran K Waikar

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