UNGA Address: संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के 77वें सत्र में विभिन्न राष्ट्र प्रमुखों का संबोधन जारी है। इसी मंच पर एक तरफ जहां फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों (Emmanuel Macron) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ की, वहीं तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोगान ने कश्मीर मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा, 'आजादी के 75 साल बाद भी भारत और पाकिस्तान के बीच शांति और एकजुटता स्थापित नहीं हो सकी है। यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। हम आशा और प्रार्थना करते हैं कि कश्मीर में एक निष्पक्ष और स्थायी शांति तथा समृद्धि स्थापित हो।' यह पहली बार नहीं है जब तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोगान ने कश्मीर मुद्दा उठाया है।

कश्मीर पर एर्दोगान का रुख

तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोगान का कश्मीर पर यह बयान तब आया है जब पिछले महीने ही SCO समिट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनका मुलाकात हुई थी। इससे पहले भी जब तुर्की ने विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर कश्मीर मुद्दा उठाया, तब भारत ने विरोध किया और इसके दो देशों के बीच का मुद्दा बताया। तुर्की के इस रुख के कारण भारत के साथ उसके संबंधों पर असर पड़ा है। भारत को लगता है कि ऐसा करते तुर्की एकतरह से पाकिस्तान की मदद कर रहा है।

2020 में पाकिस्तान की संसद में यह बोले थे एर्दोगन

इससे पहले 2020 में पाकिस्तान की संसद में एर्दोगन ने कश्मीर पर विवादित बयान दिया था। उन्होंने कश्मीरी लोगों के संघर्ष की तुलना प्रथम विश्व युद्ध के दौरान विदेशी ताकतों के खिलाफ तुर्की के लोगों की लड़ाई से की थी।' इसके बाद भारत ने उनकी टिप्पणियों की आलोचना की थी और उनसे भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करने को कहा था। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा था कि भारत जम्मू-कश्मीर पर तुर्की के राष्ट्रपति द्वारा किए गए सभी संदर्भों को खारिज करता है।

Posted By: Arvind Dubey

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