वॉशिंगटन। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने बुधवार को उस विधेयक को पारित कर दिया, जिसमें ग्रीन कार्ड जारी करने को लेकर देशों पर वर्तमान में सात फीसद की तय सीमा को हटाने की बात कही गई थी। इससे हजारों की संख्या में भारतीय आईटी पेशेवरों को फायदा होगा। ग्रीन कार्ड धारक अमेरिका में स्थाई रूप से निवास करते हुए वहां पर काम कर सकता है। रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टी दोनों के 310 से ज्यादा सांसदों से समर्थन प्राप्त 'फेयरनेस फॉर हाई स्किल्ड इमिग्रेंट्स एक्ट 2019' के आसानी से पारित होने की पहले ही संभावना जाहिर की जा रही थी।

विधेयक के प्रस्तावक इस बात से खुश थे कि 203 डेमोक्रेट और 108 रिपब्लिकन इस विधेयक को साथ मिलकर प्रायोजित कर रहे हैं। इसके प्रस्तावक एक त्वरित प्रक्रिया अपना रहे हैं जिसके तहत विधेयक को बिना सुनवाई एवं संशोधनों के पारित होने के लिए 290 मतों की जरूरत थी। मगर, 435 सदस्यों वाले हाउस में इसे 365 वोट मिले, जबकि इसके विरोध में महज 65 वोट ही पड़े थे। दरअसल, अमेरिका के आव्रजन संबंधी नियमों ने वहां उच्च दक्षता वाले भारतीय पेशेवरों के सामने दिक्कत खड़ी कर दी थी।

नियमों के अनुसार, एच-1 बी वीजा से अमेरिका पहुंचे इन पेशेवरों में से केवल सात फीसद को ही ग्रीन कार्ड मिल सकता है। अमेरिकी कांग्रेस की स्वतंत्र शोध सेवा (सीआरएस) ने कहा है कि अगर प्रत्येक देश के दक्ष पेशेवरों को ग्रीन कार्ड में मिलने वाला सात फीसद का कोटा खत्म हो जाए, तो उससे भारत और चीन के लोगों को ही नहीं अमेरिका को भी लाभ होगा। देश के हिसाब से ग्रीन कार्ड की संख्या सीमित होने से भारत और चीन के नागरिकों को औसतन कम नागरिकता मिल पाती है।

नए बिल के आने के बाद अब सात फीसद की सीमा को 15 फीसद तक बढ़ाया जा सकता है। इसी तरह, यह रोजगार-आधारित आप्रवासी वीजा पर सात प्रतिशत प्रति देश कैप को खत्म करने का भी प्रयास करता है। इसके अतिरिक्त, यह एक ऑफसेट को हटाता है जिसने चीन से व्यक्तियों के लिए वीजा की संख्या कम कर दी है। विधेयक के एक अन्य प्रावधान के अनुसार, किसी भी एक देश के अप्रवासियों को अनारक्षित वीजा का 85 फीसद से ज्यादा नहीं दिया जाएगा।